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Dharmendra Cult Movie : धर्मेंद्र ने ‘शोले’, ‘अनुपमा’ जैसी यादगार फिल्में दीं. वे सबसे ज्यादा हिट फिल्में देने वाले सुपरस्टार भी हैं. उन्होंने अपने करीबियों का हमेशा ध्यान रखा. उन्होंने एक बार अपने बहनोई की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए न सिर्फ एक फिल्म में एक्ट किया, बल्कि उसमें पैसा भी अपना लगाया. उन्होंने फीस के तौर पर एक रुपये भी चार्ज नहीं किया. फिल्म के साथ धर्मेंद्र की एक्टिंग की बहुत तारीफ हुई, मगर यह बॉक्स ऑफिस पर फेल रही. हालांकि, उन्हें ताउम्र सिर्फ एक बात का मलाल रहा, जिसका उन्होंने कई मौकों पर जिक्र भी किया.

नई दिल्ली: धर्मेंद्र एक हिट मशीन थे. उन्होंने बाकी सितारों के मुकाबले ज्यादा हिट फिल्में दीं जो उनके स्टारडम को बयां करने के लिए काफी है. धर्मेंद्र के फैंस उनकी ‘शोले’, ‘अनुपमा’ जैसी फिल्मों को याद करते हैं, मगर सुपरस्टार खुद को एक फिल्म के ज्यादा करीब पाते हैं, जिसे उन्होंने अपनी बहन-बहनोई के खातिर बनाया था. (फोटो साभार: IMDb)

धर्मेंद्र ने फिल्म में अपने करियर की सबसे शानदार परफॉर्मेंस दी थी, मगर उन्हें जिंदगी भर सिर्फ एक बात का अफसोस रहा. आईएमडीबी की रिपोर्ट के अनुसार, धर्मेंद्र ने फिल्म ‘सत्यकाम’ अपने बहनोई की मदद करने के लिए साइन की थी जो आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे. उन्होंने न सिर्फ फिल्म में पैसे लगाए, बल्कि उसमें फ्री में भी काम किया. (फोटो साभार: YouTube/videograb)

फिल्म ‘सत्यकाम’ धर्मेंद्र के बहनोई के बैनर तले बनी थी, जिसमें उन्होंने खुद के 25 लाख रुपये लगाए थे. फिल्म ‘सत्यकाम’ में धर्मेंद्र ने बेस्ट परफॉर्मेंस दी. तारीफों के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही. (फोटो साभार: YouTube/videograb)
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‘सत्यकाम’ को हिंदी भाषा में बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला था. धर्मेंद्र भी इसे अपने करियर की बेस्ट परफॉर्मेंस मानते हैं. धर्मेंद्र जब फिल्मफेयर अवॉर्ड में शामिल होने गए, तो उन्हें उम्मीद थी कि वे बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड जीतेंगे, मगर ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने कई मौकों पर अवॉर्ड न जीत पाने पर अपनी निराशा बयां की थी.(फोटो साभार: YouTube/videograb)

फिल्म ‘सत्यकाम’ ऋषिकेश मुखर्जी की दूसरी फिल्म थी, जिसमें धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर लीड रोल में थे. फिल्म के डायलॉग राजिंदर सिंह बेदी ने लिखे थे और गाने कैफी आजमी ने. इससे पहले, धर्मेंद्र-शर्मिला ने 1966 की फिल्म ‘अनुपमा’ में साथ काम किया था.

फिल्म ‘सत्यकाम’की कहानी सत्यप्रिया आचार्य के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने दादाजी के सिद्धातों के नक्शेकदम पर चलता है. वह एक इंजीनियर के तौर पर करियर शुरू करता है, पर अंतरात्मा के खिलाफ जाकर रंजना नाम की लड़की की रक्षा नहीं कर पाता, जिससे उन्हें अपराधबोध होता है. वह अपने अपराधबोध को मिटाने के लिए रंजना से शादी तो कर लेता है, लेकिन उनकी जिंदगी आसान नहीं रहती. सत्यप्रिया अपने ऊंचे उसूलों के कारण बार-बार नौकरियां बदलता है और अपनी गरीबी के बावजूद कभी गलत समझौता नहीं करता. जानलेवा बीमारी के वक्त जब परिवार के भविष्य के लिए रिश्वत लेने का मौका आता है, तो वह डगमगा जाता है, लेकिन उनकी पत्नी रंजना उन पैसों के दस्तावेजों को फाड़कर उनके सिद्धांतों की लाज रख लेती है.

फिल्म ‘सत्यकाम’ का सबसे इमोशनल मोड़ तब आता है, जब सत्यप्रिया के दादाजी जो रंजना के अतीत के कारण उनसे नाराज थे, अंत समय में उनसे मिलने आते हैं. दादाजी को अपनी विद्वता पर बड़ा घमंड था, लेकिन जब रंजना का बच्चा सबके सामने अपनी पहचान की कड़वी सच्चाई को बिना डरे स्वीकार करता है, तो दादाजी की आंखें खुल जाती हैं. उन्हें एहसास होता है कि किताबी ज्ञान और असल जिंदगी में सच का सामना करने में जमीन-आसमान का फर्क है.

फिल्म ‘सत्यकाम’ का साल 1971 में ‘पुन्नागई’ नाम से एक तमिल रीमेक था, जिसे के. बालाचंदर ने डायरेक्ट किया था. फिल्म में लीजेंड्री एक्टर जैमिनी गणेशन ने लीड रोल निभाया था.