धुरंधर-2 में कौन-सा ‘स्लो पॉइजन’ यूज किया गया? स्किन से बॉडी में पहुंचने वाला ये जहर असली या महज कल्पना

धुरंधर-2 में कौन-सा ‘स्लो पॉइजन’ यूज किया गया? स्किन से बॉडी में पहुंचने वाला ये जहर असली या महज कल्पना


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Slow Poison Used In Dhurandhar 2: बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर मूवी धुरंधर की पीक डिटेलिंग की खूब चर्चा हो रही है. यहां तक की इसमें इस्तेमाल किया गया स्लो पॉइजन भी असली है. इस जहर का नाम डाइमिथाइल मरक्यूरी है जिसकी एक बूंद भी स्किन पर डायरेक्ट लग जाए तो जिंदगी खतरे में आ जाती है.

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धुरंधर-2 में कौन-सा 'स्लो पॉइजन' यूज किया गया? डाइमिथाइल मरक्यूरी का सच जानेंZoom

धुरंधर द रिवेंज में एक ऐसा सीन दिखाया गया है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. फिल्म में रणवीर सिंह का किरदार हमजा अली मजारी, बड़े साहब को खत्म करने के लिए डाइमिथाइल मरक्यूरी का इस्तेमाल करने की कोशिश करता है.लेकिन वह सफल नहीं हो पाता. कहानी में बाद में पता चलता है कि जमील जमाली का किरदार निभा राकेश बेदी ने पहले ही यह काम कर दिया था.

इसका ही नतीजा था कि बड़े साहब कई सालों से बीमार चल रहे थे और अपने बिस्तर तक से उठ तक नहीं सकते थे. अब हम आपको यहां पूरी कहानी बताकर स्पॉइलर नहीं देंगे, लेकिन यदि आप सोशल मीडिया पर इसमें इस्तेमाल किए गए स्लो पॉइजन डाइमिथाइल मरक्यूरी के असली होने के सवालों से जुड़े पोस्ट बार-बार देख रहे हैं, तो ये लेख आपके लिए है.

डाइमिथाइल मरक्यूरी नाम का कोई जहर है?
फिल्मों में काल्पनिक चीजों को दिखाया जाना नॉर्मल है. लेकिन जब बात धुरंधर जैसी मूवी की ही जिसकी पीक डिटेलिंग रोज जमाने को चौंका रही है, तो सवाल उठाने से पहले रिसर्च कर लेना जरूरी है. डाइमिथाइल मरक्यूरी नाम का जहर वास्तव में है. ये महज डायरेक्टर आदित्य धर की कल्पना नहीं है. इस जहर का इस्तेमाल मुख्य रूप से रिसर्च में कामों किया जाता है.

डाइमिथाइल मरक्यूरी क्या है?
अमेरिकन केमिकल सोसायटी के मुताबिक, डाइमिथाइल मरक्यूरी इंसान का खोजा गया सबसे खतरनाक रसायन है. डाइमिथाइलमर्करी एक तरह न्यूरोटॉक्सिन है जो निगलने, सांस के साथ अंदर लेने या त्वचा द्वारा अवशोषित होने पर जानलेवा हो सकता है.इसके बारे में सबसे पहले 1858 में पता चला था. पर्यावरण में इसकी मौजूदगी का पता 1969 में चला, जब स्वीडन के वैज्ञानिकों ने बताया कि ये केमकल और इसका एक दूसरा रूप मिथाइलमरकरी गंदे पानी, खासकर मरकरी से प्रदूषित झीलों और सड़ी हुई मछलियों में बनता है.
क्या एक बूंद से हो सकती है मौत?
इस रिपोर्ट के अनुसार, डाइमिथाइलमर्करी, ऑर्गेनिक मर्करी यौगिकों के एक वर्ग से संबंधित है जिसे ‘एल्काइल मर्करी’ के नाम से जाना जाता है. इसका उपयोग मुख्य रूप से रिसर्च कार्यों में किया जाता है. इसका को रंग नहीं होता है, गंध में हल्का मीठा होता है. सबसे खासबात है कि ये डाइमिथाइलमर्करी त्वचा द्वारा आसानी से अवशोषित हो जाता है.इसकी 0.1 mL से भी कम मात्रा का अवशोषण ही शरीर में जानलेवा जहर बनाने के लिए काफी होता है. हालांकि ये काम करना तुरंत शुरू कर देता है, लेकिन इसके लक्षण बहुत मामूली तौर पर शुरू होते हैं. शुरुआत में ऐसा लगता है जैसे व्यक्ति को फूड प्वॉइजनिंग ही हुआ है, लेकिन ये मौत की शुरुआत होती है.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



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