निफ्टी 23,500 तक गिर सकता है:FII ने अप्रैल में ₹56 हजार करोड़ के शेयर बेचे; ईरान-अमेरिका तनाव समेत 5 फैक्टर तय करेंगे चाल

निफ्टी 23,500 तक गिर सकता है:FII ने अप्रैल में ₹56 हजार करोड़ के शेयर बेचे; ईरान-अमेरिका तनाव समेत 5 फैक्टर तय करेंगे चाल




भारतीय शेयर बाजार में कल यानी 27 अप्रैल से शुरू होने वाले हफ्ते में काफी हलचल देखने को मिल सकती है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी मीटिंग, 200 से ज्यादा कंपनियों के तिमाही नतीजे और ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव जैसे 5 बड़े फैक्टर्स बाजार की दिशा तय करेंगे। चलिए समझते हैं इस हफ्ते में बाजार में क्या हो सकता है… सपोर्ट और रेजिस्टेंस सपोर्ट जोन: 23,870 | 23,815 | 23,466 | 23,344 | 23,320 | 22,860 सपोर्ट यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। यहां खरीदारी बढ़ने से कीमत आसानी से नीचे नहीं जाती। यहां खरीदारी का मौका हो सकता है। रेजिस्टेंस जोन: 23,935 | 24,140 | 24,380 | 24,450 | 24,480 | 24,540 रेजिस्टेंस यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को ऊपर जाने में रुकावट आती है। ऐसा बिकवाली बढ़ने से होता है। रजिस्टेंस जोन पार करने पर तेजी की उम्मीद रहती है। नोट: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के लेवल्स वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार है। अब 5 फैक्टर्स जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं… 1. ईरान-इजराइल युद्ध और कच्चे तेल की चाल ईरान ने अमेरिका के साथ चर्चा करने से इनकार कर दिया है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुआ यह तनाव वैश्विक बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 105.33 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। बीते दिनों जब तेल सप्लाई के अहम समुद्री मार्ग हॉर्मूज स्ट्रेट के खुलने की खबरें आई थीं तो ब्रेंट क्रूड करीब 10% सस्ता होकर 90 डॉल प्रति बैरल पर आ गया था। शेयर बाजार पर भी इसका असर दिखा था। 2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक ग्लोबल मार्केट की नजर Fm मीटिंग पर रहेगी। यह मीटिंग मंगलवार, 28 अप्रैल से शुरू होगी और इसके फैसले बुधवार, 29 अप्रैल को आएंगे। बाजार को उम्मीद है कि इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा और इन्हें 3.50% से 3.75% के दायरे में स्थिर रखा जाएगा। 3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। अप्रैल महीने में अब तक कुल 56,363 करोड़ रुपए के शेयर बेच चुके हैं। हालांकि, घरेलू निवेशक (DIIs) बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अप्रैल में 39,478 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे हैं। शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने ₹8 हजार करोड़ से ज्यादा के शेयर बेचे इस महीने विदेशी निवेशकों ने 56 हजार करोड़ के शेयर बेचे नोट: सभी आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। 4. 200 से ज्यादा कंपनियों के Q4 नतीजे इस हफ्ते BSE पर लिस्टेड 200 से ज्यादा कंपनियां अपने चौथी तिमाही (Q4FY26) के नतीजे पेश करेंगी। निफ्टी की कंपनियों में कोल इंडिया, अल्ट्राटेक सीमेंट, मारुति सुजुकी, बजाज फाइनेंस, अडाणी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व, HUL और कोटक महिंद्रा बैंक पर नजर रहेगी। इनके अलावा ACC, अडाणी पावर, डीमार्ट भी अपने नतीजे घोषित करेंगे। 5. टेक्निकल नजरिया; 23,500 तक जा सकता है निफ्टी रेलीगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च SVP अजीत मिश्रा के मुताबिक निफ्टी अपने अहम सपोर्ट 23,900 के नीचे फिसल गया है। अब नजदीकी सपोर्ट 23,500 पर है। ऊपर की तरफ 24,200-24,500 का जोन मजबूत रेजिस्टेंस है। जब तक क्रूड की कीमतें नहीं घटतीं और ग्लोबल संकेत नहीं सुधरते, इस स्तर पर बिकवाली का दबाव बना रहेगा। LKP सिक्योरिटीज के रूपक डे ने कहा कि निफ्टी 24,000 के नीचे आ गया है। 24,200 के ऊपर ब्रेकआउट ही सेंटिमेंट को स्थिर कर सकता है। वेल्थ व्यू एनालिटिक्स का अगले हफ्ते का आउटलुक मंगलवार (28 अप्रैल) और बुधवार (29 अप्रैल) को बाजार में जोरदार इंट्राडे मूवमेंट देखने को मिल सकता है। एक्टिव ट्रेडर्स के लिए कमाई के अच्छे मौके बन सकते हैं। इसके अलावा, गुरुवार (30 अप्रैल) का सेशन काफी अहम होगा। इस दिन का हाई (सबसे ऊंचा स्तर) और लो (सबसे निचला स्तर) आगे के ट्रेंड के लिए बड़े संकेत देंगे: वेल्थ व्यू की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि ग्लोबल खबरों और घटनाक्रमों की वजह से बाजार में काफी उतार-चढ़ाव बना रहेगा। इसलिए इन 3 अहम बातों पर नजर रखना चाहिए: बीते हफ्ते 2% गिरकर बंद हुआ था बाजार पिछले हफ्ते निफ्टी में 2% की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसमें सबसे ज्यादा बिकवाली आईटी (IT), ऑटो और कंज्यूमर शेयर्स में रही। शुक्रवार को निफ्टी 275 पॉइंट (1.14%) गिरकर 23,898 के स्तर पर बंद हुआ था। सेंसेक्स 1000 अंक गिरा था।
डिस्क्लेमर: ये लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। ऊपर दी गई राय और सलाह व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों की हैं, न कि दैनिक भास्कर की। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि कोई भी निवेश फैसला लेने से पहले सर्टिफाइड विशेषज्ञों से सलाह जरूर लें।



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