Health Tips: विंध्य क्षेत्र की वादियों में कई ऐसी औषधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. इन्हीं में से एक है गूलर का पेड़, जिसे आयुर्वेद में अत्यंत उपयोगी माना गया है. सीधी के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह के अनुसार, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गूलर का विशेष रूप से उपयोग किया गया था. गूलर के पत्तों, फलों और तने का सेवन कई प्रकार की बीमारियों में लाभकारी साबित होता है. आयुर्वेद में इसे अंजीर के समान गुणकारी माना गया है. गूलर की शाखाएं मोटी होती हैं और इसके पत्ते दिल के आकार और खुरदरी सतह वाले होते हैं. इसके फल लगभग 2 से 3 सेंटीमीटर व्यास के होते हैं, जो पकने पर हरे से पीले या लाल रंग में बदल जाते हैं. इस पेड़ पर सालभर फूल और फल लगते हैं, हालांकि जुलाई से दिसंबर के बीच इसकी पैदावार अधिक होती है. इसके पके फलों का सेवन शरीर को ताकत देता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक माना जाता है.

