ये पहाड़ी बूटी चुटकियों में छूमंतर कर देगी बुखार, अंग्रेजी दवाओं की तरह कोई साइड इफेक्ट नहीं

ये पहाड़ी बूटी चुटकियों में छूमंतर कर देगी बुखार, अंग्रेजी दवाओं की तरह कोई साइड इफेक्ट नहीं


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कटकी पहाड़ों में मिलने वाली एक पारंपरिक जड़ी-बूटी है, जो खासकर दारमा घाटी में पाई जाती है. पहाड़ों में इसे बुखार के लिए रामबाण औषधि माना जाता है. आज भी गांवों में जब किसी को बुखार होता है, तो कटनी का काढ़ा बनाकर दिया जाता है. बुजुर्गों के अनुसार, यह शरीर का तापमान कम करने और जल्दी राहत देने में मदद करती है. लोकल 18 से पिथौरागढ़ की औषधियों की जानकार आसमती बनग्याल बताती हैं कि इससे शरीर का तापमान धीरे-धीरे कम होता है. कटकी का उपयोग आमतौर पर काढ़ा बनाकर किया जाता है.

what is katki

कटकी पहाड़ों में मिलने वाली एक पारंपरिक जड़ी-बूटी है, जिसे स्थानीय लोग कई सालों से औषधि के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे हैं. यह खासतौर पर उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में पाई जाती है. गांव के बुजुर्गों का मानना है कि कटकी प्रकृति की ऐसी देन है, जो कई छोटी-मोटी बीमारियों में राहत देती है. खासकर बुखार होने पर इसका इस्तेमाल बहुत ज्यादा किया जाता है.

where you can find the katki

कटकी मुख्य रूप से ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में उगती है. यह खासकर दारमा घाटी जैसे इलाकों में पाई जाती है. दारमा घाटी का मौसम ठंडा और साफ होता है, जो कई तरह की जड़ी-बूटियों के लिए अनुकूल माना जाता है. यहां के जंगलों और घास के मैदानों में यह प्राकृतिक रूप से उगती है. स्थानीय लोग इसे पहचानते हैं और जरूरत पड़ने पर जंगल से लाकर इसका उपयोग करते हैं.

beneficial for fever

पहाड़ों में कटकी को बुखार के लिए बहुत असरदार माना जाता है. पुराने समय में जब गांवों में अस्पताल या दवाइयों की सुविधा कम होती थी, तब लोग प्राकृतिक जड़ी-बूटियों पर ही निर्भर रहते थे. ऐसे में अगर किसी को बुखार हो जाता था तो कटकी का काढ़ा बनाकर दिया जाता था. 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला और औषधियों की जानकार आसमती बनग्याल बताती हैं कि इससे शरीर का तापमान धीरे-धीरे कम होता है और व्यक्ति को राहत मिलती है. हमने बचपन से ही यही इस्तेमाल किया है और आज भी यही इस्तेमाल करते हैं.

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how to use

कटकी का उपयोग आमतौर पर काढ़ा बनाकर किया जाता है. इसे एक ग्लास पानी में डालकर रात भर भीगा दें, फिर अगले दिन सुबह-सुबह खाली पेट इस पानी के साथ-साथ कटकी को भी चबाकर खा लें. कुछ लोग इसे पीसकर भी इस्तेमाल करते हैं. पहाड़ों में यह तरीका पीढ़ियों से चला आ रहा है और आज भी कई गांवों में इसी तरह इसका उपयोग किया जाता है.

part of a tradition

कटकी सिर्फ एक जड़ी-बूटी नहीं है, बल्कि यह पहाड़ों के पारंपरिक ज्ञान और संस्कृति का भी हिस्सा है. आसमाती बनग्याल लोकल 18 से बताती हैं कि कौन-सी जड़ी-बूटी किस बीमारी में काम आती है. यह ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता रहा है. इसलिए आज भी कई लोग छोटी-मोटी बीमारियों के लिए पहले इन प्राकृतिक औषधियों का सहारा लेते हैं.

it is still used in pahad

आज भले ही आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो गई हैं, लेकिन पहाड़ों में कई लोग अब भी कटकी जैसी जड़ी-बूटियों पर भरोसा करते हैं. खासकर दूरदराज के गांवों में जब तुरंत डॉक्टर या दवा उपलब्ध नहीं होती, तब लोग इस प्राकृतिक औषधि का सहारा लेते हैं. यह न सिर्फ सस्ती होती है बल्कि आसानी से जंगलों में मिल भी जाती है.

gift from nature

कटकी पहाड़ों की प्रकृति की एक अनमोल देन है. यह हमें याद दिलाती है कि हमारे आसपास की प्रकृति में ही कई बीमारियों का इलाज छिपा होता है. अगर इन जड़ी-बूटियों को सही तरीके से पहचाना और संरक्षित किया जाए, तो आने वाली पीढ़ियां भी इनके फायदों का लाभ उठा सकती हैं.



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