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टेक्स्ट नेक सिंड्रोम का मतलब है कि मोबाइल या डिजिटल उपकरणों को देखने के लिए लंबे समय तक सिर को आगे और नीचे की ओर झुकाए रखने के कारण होने वाला गर्दन का दर्द, कंधे और ऊपरी पीठ का दर्द. चिकित्सक बताते है कि यह रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त भार डालता है, जिससे मांसपेशियों में खिंचाव, नसों का दबना और सिरदर्द हो सकता है. यह समस्या मुख्य रूप से स्क्रीन के अधिक उपयोग के कारण होती है.
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में एक नई बीमारी धीरे धीरे फैल रही है. बदलते युग और बदलती जीवन शैली में बढ़ता मोबाइल और लेपटॉप का क्रेज लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है. अत्यधिक मोबाइल का इस्तेमाल करना या लेपटॉप का चलाना लोगों के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है. अधिक समय तक मोबाइल, लेपटॉप चलाने से अब टेक्स्ट नेक सिंड्रोम की बीमारी अपना शिकार बना रही है.
क्या होता है टेक्स्ट नेक सिंड्रोम
टेक्स्ट नेक सिंड्रोम का मतलब है कि मोबाइल या डिजिटल उपकरणों को देखने के लिए लंबे समय तक सिर को आगे और नीचे की ओर झुकाए रखने के कारण होने वाला गर्दन का दर्द, कंधे और ऊपरी पीठ का दर्द. चिकित्सक बताते है कि यह रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त भार डालता है, जिससे मांसपेशियों में खिंचाव, नसों का दबना और सिरदर्द हो सकता है. यह समस्या मुख्य रूप से स्क्रीन के अधिक उपयोग के कारण होती है. चिकित्सक ने कहा कि सर्वाइकल की शुरुआत भी इसके कारण हो सकती है. उन्होंने बताया कि यह 18 वर्ष से 44 साल के लोगों में देखी जा रही है. इससे बचना बेहद जरूरी है. इसके लिए लगातार मोबाइल का इस्तेमाल ना करें. बीच-बीच में रेस्ट जरुरी है. वहीं मोबाइल आदि किसी भी स्क्रीन को झुक कर देखने से बचने की कोशिश करें.
जान लें बीमारी के लक्षण
आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि वर्तमान में मरीज टेक्स्ट नेक सिंड्रोम के बारे में कम ही जानता है. उन्होंने कहा कि अस्पतालों में इस बीमारी के मरीजों की संख्या काफी तेज़ी से बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि यह कम उम्र के लोगों में भी हो रही है जिसका मुख्य कारण अत्यधिक मोबाइल का इस्तेमाल है. उन्होंने कहा कि इसके कुछ प्रमुख कारण है जिन्हे इग्नोर नहीं करना चाहिए. डॉ. आशीष मित्तल ने बताया कि टेक्स्ट नेक सिंड्रोम के मुख्य लक्षणों में गर्दन, कंधों और ऊपरी पीठ में तेज या लगातार दर्द और अकड़न होना है, जो लंबे समय तक स्मार्टफोन या टैबलेट के इस्तेमाल के कारण उत्पन्न होता है. जब अधिक समय तक गर्दन झुकी रहेगी तो यह शुरू होता है. उन्होंने कहा कि इस बीमारी के कारण सिरदर्द, गर्दन की गति में कमी, बांहों में सुन्नपन या झुनझुनी और झुककर बैठने की आदत भी हो सकती है. इससे बचाव जरुरी है और समस्या बढ़ने से पहले समय रहने इसका उपचार कराना जरुरी है अन्यथा यह आगे चलकर जोखिम भरा भी हो सकता है.
टेक सिंड्रोम से बचाव के उपाय
वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि टेक्स्ट नेक सिंड्रोम बीमारी से बचने के लिए कुछ उपाय किये जा सकते है. सबसे जरूरी है कि फोन का उपयोग करते समय सिर को आगे झुकाने के बजाय, स्क्रीन को आंखों के स्तर पर ही रखें. फोन या कोई भी स्क्रीन देखते समय रीढ़ की हड्डी सीधी रहनी चाहिए. उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन, लेपटॉप या टीवी देखने समय कम से कम 20 मिनट का बिच बिच में ब्रेक जरूर लेते रहें और स्ट्रेचिंग करें. यह स्थिति गलत मुद्रा के कारण गर्दन की मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव से उत्पन्न होती है. यदि मोबाइल या लेपटॉप की जरूर ना हो तो इससे दुरी ही बनाये रखें.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें