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शरीर से टॉक्सिन निकालना हो या दर्द से राहत, जानिए क्यों आज भी एथलीटों की पसंद है हिजामा थेरेपी

शरीर से टॉक्सिन निकालना हो या दर्द से राहत, जानिए क्यों आज भी एथलीटों की पसंद है हिजामा थेरेपी


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Hijama Therapy Benefits: आज के दौर में प्रदूषण और गलत खान-पान के कारण हमारे खून में टॉक्सिंस जमा हो जाते हैं, जो कई बीमारियों की जड़ हैं. देहरादून के विशेषज्ञ डॉ. सिराज सिद्दीकी बताते हैं कि ‘हिजामा’ या ‘कपिंग थेरेपी’ शरीर के दूषित रक्त को साफ करने की एक प्राचीन और असरदार पद्धति है. पुराने जमाने में जहां देहात में हिरन के सींग काटकर गंदा खून निकाला जाता था, वहीं आज यह थेरेपी आधुनिक कप्स और वैक्यूम तकनीक से की जा रही है. ओलंपिक चैंपियन माइकल फेल्प्स जैसे एथलीट्स द्वारा इसे अपनाने के बाद, अब आम लोग भी माइग्रेन, स्लिप डिस्क और स्किन की समस्याओं के लिए हिजामा का सहारा ले रहे हैं.

देहरादून: शरीर में बीमारियों की एक बड़ी वजह दूषित रक्त और टॉक्सिन्स का जमा होना माना जाता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एक अच्छी सेहत के लिए समय-समय पर खून को प्यूरिफाई करना और खराब पदार्थों को बाहर निकालना बेहद जरूरी होता है. आज के दौर में इसके लिए ‘हिजामा’ या ‘कपिंग थेरेपी’ का व्यापक उपयोग हो रहा है. दिलचस्प बात यह है कि यह कोई नई तकनीक नहीं है, बल्कि पुराने जमाने में देहात की चिकित्सा पद्धति का हिस्सा हुआ करती थी, जिसमें हिरन के सींग का इस्तेमाल कर शरीर से खराब खून निकाला जाता था.

हजारों साल पुरानी है यह चिकित्सा पद्धति
देहरादून के हिजामा थेरेपिस्ट डॉ. सिराज सिद्दीकी ने बताया कि हिजामा कपिंग थेरेपी हजारों साल पुरानी पद्धति है. मिडिल ईस्ट के देशों में ‘हिजामा वेट कपिंग’ का जबरदस्त ट्रेंड है, जबकि चीन में ‘ड्राई कपिंग थेरेपी’ का अधिक उपयोग किया जाता है. डॉ. सिद्दीकी बताते हैं कि ओलंपिक के दौरान जब मशहूर अमेरिकी तैराक माइकल फेल्प्स के शरीर पर गोल निशान देखे गए, तब दुनिया भर में इस थेरेपी की चर्चा बढ़ गई. आज कई एथलीट, जिमनास्ट और स्पोर्ट्स पर्सन बेहतर ब्लड सर्कुलेशन और दर्द से राहत पाने के लिए नियमित रूप से कपिंग थेरेपी का सहारा लेते हैं.

दर्द निवारण से लेकर ब्यूटी ट्रीटमेंट तक फायदेमंद
डॉ. सिद्दीकी के अनुसार, हिजामा थेरेपी सिर्फ दर्द कम करने तक सीमित नहीं है. यह ब्यूटी ट्रीटमेंट जैसे कि बालों की समस्या, स्किन की चमक, एंटी-एजिंग और त्वचा रोगों के समाधान में भी बेहद लाभकारी मानी जाती है. आज के समय में लोग माइग्रेन, जोड़ों का दर्द, कमर दर्द, स्लिप डिस्क और सर्वाइकल जैसी गंभीर समस्याओं के इलाज के लिए हिजामा का विकल्प चुन रहे हैं. यह पद्धति शरीर के उन हिस्सों से जमे हुए टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है जहां सामान्य ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है.

वेट, ड्राई और फायर कपिंग की तकनीक
उपचार की प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. सिद्दीकी ने बताया कि वेट और ड्राई हिजामा के अलावा ‘फायर कपिंग थेरेपी’ भी काफी प्रचलित है. इस तकनीक में कप के भीतर थोड़े समय के लिए आग की गर्मी दी जाती है, जिससे कप के अंदर वैक्यूम बनता है और वह त्वचा से मजबूती से चिपक जाता है. इसके बाद तिल का तेल लगाकर कपिंग के जरिए शरीर के भीतर दबे हुए गंदे खून और विषैले पदार्थों को बाहर निकालने की कोशिश की जाती है. यह प्रक्रिया न केवल शरीर को डिटॉक्स करती है बल्कि मांसपेशियों के खिंचाव को भी कम करती है.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें



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