Jehanabad Art and Culture: कभी बंदूकों की तड़तड़ाहट के लिए चर्चित रहा जहानाबाद आज अपनी कला और संस्कृति से विश्व पटल पर चमक रहा है. टेहटा निवासी 50 वर्षीय वासुकीनाथ ताम्रकार ने एक ऐसी ‘अद्भुत मटका वादन’ कला विकसित की है. जिसमें संगीत की धुन के साथ-साथ बारूद की चिंगारियां और पटाखों जैसी आवाजें निकलती हैं. हाल ही में वसंत पंचमी महोत्सव के दौरान जब वासुकीनाथ ने मटके पर अपनी जादुई थाप दी, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए. राजस्थान की यात्रा से प्रेरित होकर उन्होंने इस कला को सीखा और बिहार की माटी में पिरोया. खास बात यह है कि उनके मटके से निकलने वाली रोमांचक आवाजों और धुन के कारण उन्हें बिहार और झारखंड में खासी लोकप्रियता मिल रही है. उनकी इस साधना को देखते हुए बिहार सरकार ने उन्हें कलाकार पेंशन योजना से भी जोड़ा है. जिला कला संस्कृति पदाधिकारी चांदनी कुमारी ने इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया है. वासुकीनाथ का यह सफर साबित करता है कि प्रतिभा अगर लीक से हटकर हो, तो वह अपनी पहचान खुद बना लेती है.
