होंडा-निसान घाटे की ओर बढ़ रहीं‎:ट्रम्प टैरिफ और चीनी कारों से‎ जापानी ऑटो इंडस्ट्री खतरे में‎

होंडा-निसान घाटे की ओर बढ़ रहीं‎:ट्रम्प टैरिफ और चीनी कारों से‎ जापानी ऑटो इंडस्ट्री खतरे में‎




पिछले माह होंडा के चीफ मिबे तोशिहिरो ने‎एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कंपनी 1957 ‎के बाद पहली बार घाटा उठाने की ओर बढ़ रही ‎‎है। उन्होंने नाकामी की जिम्मेदारी लेते हुए ‎अपनी और अपने डिप्टी की तनख्वाह में‎ 30% कटौती की जानकारी दी। हालांकि होंडा ‎‎गंभीर मुश्किलों का सामना कर रही अकेली ‎‎जापानी कार कंपनी नहीं है। पिछले सप्ताह मिबे‎ने आगाह किया कि जापान की ऑटोमोबाइल ‎‎इंडस्ट्री अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। ‎‎अमेरिका में आयातित कारों पर 25% टैरिफ‎ से इंडस्ट्री का मुनाफा घटा है। सबसे अधिक ‎‎असर चीनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों ने डाला है।‎
बिक्री के हिसाब से दुनिया की छठी बड़ी ‎‎कंपनी निसान में लगातार दूसरे साल कटौती‎ चल रही है। 2028 तक सात फैक्ट्रियां बंद ‎करने की योजना है। 2019 में दुनियाभर में‎ कारों की बिक्री में जापानी कार कंपनियों का ‎‎हिस्सा 31% था। यह पिछले साल गिरकर ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎26% हो गया। वहीं दक्षिण पूर्व एशिया में‎ मार्केट शेयर 2023 के 68% से गिरकर‎ 2025 में 57% रह गया। पड़ोस में बढ़ रही ईवी‎ पिछले साल ग्लोबल कार मार्केट में हाईब्रिड‎ सहित 26% इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री हुई‎ थी। यह 2019 से 3% अधिक है। जापान के पड़ोस में बिक्री अधिक है। पिछले साल ‎एशिया में बिकी एक तिहाई कारें इलेक्ट्रिक हैं।‎



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