28 साल पुराना वो यादगार गाना, जिसे जावेद अख्तर ने लिखने से कर दिया था इनकार, तिकड़ी ने मिलकर बना दिया ब्लॉकबस्टर

28 साल पुराना वो यादगार गाना, जिसे जावेद अख्तर ने लिखने से कर दिया था इनकार, तिकड़ी ने मिलकर बना दिया ब्लॉकबस्टर


करण जौहर ने बॉलीवुड को एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दी हैं. जिसमें रोमांटिक फिल्मों की भरमार रही. 90 के दशक की एक ऐसी ही फिल्म थी, जिसका टाइटल सॉन्ग लिखने से जावेद अख्तर ने मना कर दिया था. मगर किसे पता था उस फिल्म का वही टाइटल सॉन्ग सदाबहार गानों में शामिल हो जाएगा. 28 साल पुराना ये गाना आज भी हर किसी के फेवरेट सॉन्ग की लिस्ट में शुमार है.

मूवी में शाहरुख खान, रानी मुखर्जी और काजोल ने एक साथ स्क्रीन शेयर किया था. चलिए जानते हैं इस फिल्म के गाने के किस्से के बारे में, आखिर क्यों जावेद अख्तर ने मना कर दिया था.

शाहरुख खान की हिट फिल्म

दरअसल हम जिस फिल्म की बात कर रहे हैं, वो कोई और नहीं बल्कि ‘कुछ-कुछ होता है’ मूवी है. यह शाहरुख खान की हिट फिल्मों में से एक है. ‘कुछ-कुछ होता है’ 1998 में रिलीज हुई थी. 28 साल बाद भी इस मूवी के एक-एक गाने दर्शकों की जुबान पर याद हैं. वह आज भी इसे भूल नहीं पाए हैं. शादी हो या कोई खास फंक्शन, मूवी ‘कुछ-कुछ होता है’ के गाने हमेशा ही आपको सुनाई देंगे. लोग इसे सुनना पसंद करते हैं. वहीं इसका टाइटल सॉन्ग तो आज भी आइकॉनिक है. लेकिन कम ही लोग जानते होंगे कि करण जौहर चाहते थे कि इसका टाइटल ट्रैक जावेद अख्तर तैयार करें, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था, जिसके बाद करण काफी मायूस हो गए थे.

कैसे बना आइकॉनिक टाइटल ट्रैक

आज भले ही ‘कुछ कुछ होता है’ का टाइटल ट्रैक बॉलीवुड के सबसे आइकॉनिक गानों में गिना जाता हो, लेकिन इसकी शुरुआत इतनी आसान नहीं थी. गीतकार समीर अंजान ने ‘द महुआ शो’ से बात करते हुए फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ के टाइटल ट्रैक के बारे में बताया कि जब करण जौहर अपनी पहली फिल्म बना रहे थे, तब वो काफी नर्वस थे और हर चीज को लेकर बेहद सावधानी बरत रहे थे. समीर अंजान ने बताया कि शुरुआत में यह फिल्म जावेद अख्तर को ऑफर हुई थी. ऐसे में उन्हें लगा कि शायद फिल्म के गानों में गहरी शायरी और भारी शब्दों की जरूरत होगी. इसी सोच के साथ वो कुछ कठिन और साहित्यिक लाइन्स लिखकर करण जौहर के पास पहुंचे.

लेकिन करण जौहर की सोच बिल्कुल अलग थी. करण ने मुझसे कहा, “सर ये आप क्या लिखकर लाए हैं. मैं वो ढूंढ रहा हूं, जो आप लिखते हैं. सिंपल वर्ड्स, सीधी बात करो आप. मुझे इसमें बहुत शायरी वगैरह नहीं चाहिए.” बल्कि ऐसे शब्द चाहिए जो सीधे दिल तक पहुंचें. करण चाहते थे कि गाना आसान हो, सच्चा लगे और हर कोई उसे महसूस कर सके. बस यही सोच आगे चलकर ‘कुछ कुछ होता है’ के उस टाइटल ट्रैक की सबसे बड़ी ताकत बन गई, जिसे लोग आज भी उतना ही पसंद करते हैं.

कैसे तैयार हुआ गाना

समीर अंजान आगे बताते हैं, “मैंने इस गाने को बनाने के लिए 2-3 दिन का वक्त मांगा और मैं ये मुखड़ा (कुछ कुछ होता है…) लिखकर ले गया, जो आपने सुना. वो इसे सुनने के बाद उछल पड़ा. करण बोला कि सर ये चाहिए. मेरे दिमाग में भी फितूर था. मैंने बोला करण, शायद तुमको लग रहा है ये बड़ा सिंपल है. क्योंकि तुम्हारी फिल्म कमाल की है. ऐसा न लगे कि गाना बहुत सिंपल सा लगे.” इसका रिप्लाई करते हुए करण ने कहा, “सर मुझे अभी कंफ्यूज मत करो, मुझे जो चाहिए था वो मिल गया है.” उसी दिन मुझे आहट हो गई थी कि ये फिल्म तो अच्छी बनाएगा. इस तरह यह गाना तो हिट हुआ ही, साथ ही फिल्म भी ब्लॉकबस्टर साबित हुई.

बॉक्स ऑफिस पर ‘कुछ कुछ होता है’ ने गाड़ा झंडा

साल 1998 में रिलीज हुई ‘कुछ कुछ होता है’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उस दौर की सबसे बड़ी बॉलीवुड सेंसेशन बन गई थी. रोमांस, दोस्ती और इमोशंस से भरी इस फिल्म को लोगों ने इतना पसंद किया कि यह साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई. कोईमोई की रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म का बजट करीब 10 से 14 करोड़ रुपये था, लेकिन कमाई के मामले में इसने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया. इंडिया में फिल्म का नेट कलेक्शन लगभग 47 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, जबकि वर्ल्डवाइड इसने करीब 106 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजनेस किया.



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