Abortion Pill Restriction: डायना (बदला हुआ नाम) 28 साल की कामकाजी लड़की थी. एक बार नाइट आउट पार्टी के बाद उसके दोस्त से अनजाने में शारीरिक संबंध बन गए. कुछ हफ्तों बाद जब टेस्ट पॉजिटिव आया तो उसकी दुनिया हिल गई. प्रेग्नेंसी की खबर ने उसके होश उड़ा दिए. फिर उसने सोशल मीडिया पर अबॉर्शन पिल खोजी और मिफेप्रिस्टोन के बारे में पढ़ा. बिना किसी डॉक्टर की सलाह के उसने ऑनलाइन ऑर्डर कर मेल से दवा मंगाई और खा ली. 24 घंटे बाद मिसोप्रोस्टोल भी ले लिया, कुछ दिनों तक तेज दर्द और ब्लीडिंग हुई और फिर काम हो गया.
डायना जैसी हजारों महिलाएं पिछले कुछ सालों से अमेरिका में अबॉर्शन का यही यही रास्ता अपना रही थीं और बिना डॉक्टरी सलाह के खुद ही ये पिल्स लेकर काम चला रही थीं लेकिन अब अमेरिकी अदालत ने इस आसान रास्ते पर अस्थायी ब्रेक लगा दिया है.
यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फिफ्थ सर्किट ने लुयिसियाना राज्य की याचिका पर यह फैसला दिया है. लिहाजा अब महिलाएं अपनी मर्जी से बिना प्रिस्क्रिप्शन के गर्भपात की यह दवा नहीं मंगा सकेंगी. हालांकि अमेरिका की अदालत के इस फैसले का भारत में क्या होगा असर, आइए यह भी आपको आगे बताते हैं..
बता दें कि मिफेप्रिस्टोन (Mifeprex, Korlym या RU-486) मेडिकल अबॉर्शन की मुख्य दवा है. यह प्रोजेस्टेरोन हार्मोन को ब्लॉक कर गर्भाशय की लाइनिंग को तोड़ देती है. इसे लेने के 24-48 घंटे बाद मिसोप्रोस्टोल ली जाती है, जो गर्भ को बाहर निकालने में मदद करती है. यह 70 दिनों तक की गर्भावस्था को 99.6% तक हटा देती है. FDA ने इसे 2000 में मंजूरी दी थी और कभी से यह काफी सुरक्षित दवा मानी जाती है. अबॉर्शन की इस दवा को भारत में भी इस्तेमाल किया जाता है.
क्यों हो रहा बवाल
बता दें कि 2022 में अमेरिका के कई राज्यों में अबॉर्शन पर पाबंदी लगाई गई थी लेकिन लेकिन टेलीहेल्थ और मेल सुविधा से महिलाएं इसे घर बैठे मंगवा लेती थीं. डेमोक्रेटिक राज्यों के शील्ड लॉ ने इसे और आसान बना दिया. हालात ये हो गए कि अमेरिका में गर्भपातों की संख्या कम होने के बजाय 60 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई.
इतना ही नहीं अमेरिका में एंटी-अबॉर्शन समूहों का तर्क है कि बिना निगरानी के दवा का इस्तेमाल खतरनाक है. वे शील्ड लॉ भी खत्म करना चाहते हैं. उनका कहना है कि इससे राज्य के कानूनों को नुकसान पहुंच रहा था.
अब अदालत ने दिया फैसला
गर्भपात में बढ़ोत्तरी को देखते हुए अमेरिकी अदालत ने अस्थायी आदेश दिया है कि मिफेप्रिस्टोन अब टेलीहेल्थ या मेल से नहीं दी जा सकेगी. इसे इन-पर्सन (व्यक्तिगत रूप से) फार्मेसी से लेना होगा. अदालत ने कहा कि FDA का नियम राज्य के अबॉर्शन विरोधी कानूनों का उल्लंघन करता है.
हालांकि महिलाओं के लिए अदालत का यह आदेश सिरदर्द बन सकता है, क्योंकि अब हर महिला को इस दवा के लिए फिजिकली डॉक्टर के पास जाना होगा.अबॉर्शन अधिकार समूहों का कहना है कि यह महिलाओं की पहुंच को मुश्किल बना रहा है, खासकर दूर-दराज या प्रतिबंधित इलाकों में. इसी के साथ अब दवा कंपनी Danco Laboratories ने सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए समय मांगा है.
भारत में क्या पड़ सकता है इसका असर
विशेषज्ञों की मानें तो भारत में इसका खास असर इसलिए नहीं पड़ेगा क्योंकि यहां पहले से ही अबॉर्शन की दवाओं को लेकर सख्त नियम लागू है. यहां बिना डॉक्टरी प्रिस्क्रिप्शन के मिफेप्रिस्टोन दवा नहीं मिलती है. ऑनलाइन यह दवा मंगाने के लिए भी डॉक्टर का पर्चा जरूरी है.
इसके अलावा भारत और अमेरिका में नियमों में भी अंतर है. भारत में सीडीएससीओ की गाइडलाइंस और नियमों के तहत काम होता है, जबकि अमेरिका में एफडीए की मंजूरी से.
ऐसे में भारत में MTP (Medical Termination of Pregnancy) Act, 1971 (संशोधित 2021) के तहत मेडिकल अबॉर्शन कानूनी है. मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल दोनों दवाएं शेड्यूल H दवाएं हैं, जिन्हें डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर फार्मेसी से लिया जा सकता है और इसे गर्भावस्था के 9 हफ्ते (63 दिन) तक इस्तेमाल किया जा सकता है.

