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Dog Summer Care Tips: भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान ने इन दिनों हर किसी का हाल बेहाल कर दिया है. चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के थपेड़ों से सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि बेजुबान जानवर भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं. अगर आप भी एक डॉग लवर हैं और आपके घर पर कुत्ता है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. आज हम आपको बताएंगे कि गर्मी में डॉग का कैसे खयाल रखा जाए. (रिपोर्ट: शिवांक द्विवेदी/सतना)
इसानों के मुकाबले कुत्तों को गर्मी अधिक सताती है. गर्मी में आपकी जरा सी लापरवाही आपके प्यारे डॉग की जान पर भारी पड़ सकती है. पशु चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि इस तपती गर्मी में डॉग्स को हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और गंभीर स्किन इंफेक्शन का सबसे ज्यादा खतरा होता है. लोकल 18 से खास बातचीत में सतना के पशु चिकित्सक डॉ. बृहस्पति भारती ने कहा कि वेटनरी में इस समय सबसे ज्यादा मामले हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के आ रहे हैं.
कुत्ते इंसानों की तरह शरीर से पसीना नहीं बहा सकते, इसलिए वे गर्मी से राहत पाने के लिए अपनी जीभ बाहर निकालकर लगातार हांफते यानी पेंटिंग करते हैं. हांफते समय उनकी जीभ, मुंह और श्वसन नली से लार वाष्पित होती है, जिससे उनके शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है.
गर्मियों के सीजन में कुत्तों में टिक्स यानी किलनी का प्रकोप काफी बढ़ जाता है. लंबे बालों वाली ब्रीड जैसे- गोल्डन रिट्रीवर, जर्मन शेफर्ड और कॉकर स्पैनियल में घने बालों के कारण टिक्स आसानी से छिप जाते हैं. इन टिक्स के कारण बेबेसिओसिस नाम की गंभीर प्रोटोजोअन बीमारी हो सकती है, जिसे आम भाषा में टिक फीवर भी कहते हैं.
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इसमें कुत्ते का तापमान 105 से 106 डिग्री तक पहुंच जाता है. इस बीमारी में कुत्तों की नाक से खून भी आने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में एपिस्टेक्सिस और बघेलखंड में लोग विनास फूटना भी कहते हैं. वहीं इस बीमारी में कुत्तों की जान जाने का खतरा बहुत अधिक होता है.
गर्मी से बचाव के लिए डॉग्स को सुबह 9 से 10 बजे से पहले और शाम को 6 बजे के बाद ही सैर पर बाहर ले जाएं. दोपहर की तेज धूप में उन्हें बिल्कुल बाहर न निकालें. चूंकि कुत्तों में स्वेट ग्लैंड्स नहीं होतीं, इसलिए उन्हें रोज नहलाना इतना जरूरी नहीं है लेकिन हफ्ते में एक बार अच्छे से नहलाना चाहिए है.
डॉग्स को बहुत ज्यादा पानी में न रखें और पंजे साफ रखें क्योंकि लगातार गीलेपन से पंजों में रेडनेस, इचिंग या पायोडर्मा जैसी बीमारियां पनप सकती हैं. वहीं साइबेरियन हस्की जैसे विदेशी ब्रीड वाले डॉग्स को तो दिन-रात कूलर या एसी में ही रखना अनिवार्य है.
अक्सर कई लोग डॉग्स को दिन में एक-दो बार पानी देकर भूल जाते हैं. उन्हें हमेशा साफ और ठंडा पानी उपलब्ध कराएं. आप बाजार में मिलने वाले डॉग्स स्पेशल ओआरएस घोल का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. साथ ही उन्हें हल्का और सुपाच्य भोजन दें. अगर आपका डॉग वेजिटेरियन डाइट पर है, तो आप उसे पानी से भरपूर फल जैसे- तरबूज और खरबूजा खिला सकते हैं. डॉग्स इसे बड़े चाव से खाते हैं और इससे उनका डिहाइड्रेशन भी दूर होता है.
कुत्तों का समय-समय पर टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है. अन्यथा, उन्हें पार्वोवायरस जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं. गर्मियों के दौरान टिक संक्रमण भी तेजी से फैलता है, जिससे कुत्तों को कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं. इसलिए, नियमित रूप से डॉक्टर से परामर्श लेकर टिक संक्रमण का इलाज कराना जरूरी है.

