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- Dainik Bhaskar & Aditya Birla MF Workshop: Goal Investment & SIP Strategy Explained
जोधपुर18 मिनट पहले
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पाली के सुशील मूंदड़ा, जोनल हैड ललित शर्मा, जोधपुर के विशेषज्ञ सुरेश अरोड़ा, चेतन लाखोटिया और सुशील मूंदड़ा ने सवालों के जवाब दिए।
दैनिक भास्कर और आदित्य बिड़ला म्यूचुअल फंड की ओर से शनिवार को ‘शिक्षित निवेशक, विकसित भारत’ विषय पर अवेयरनेस वर्कशॉप हुई। पांचबत्ती स्थित एक होटल में हुई इस वर्कशॉप में देशभर से आए विशेषज्ञों ने सही समय पर और लक्ष्य आधारित निवेश के बारे में प्रेजेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी।
कार्यक्रम के अंत में आयोजित पैनल डिस्कशन में शहर के युवा, बुजुर्ग और महिलाओं ने निवेश से जुड़े सवाल पूछे। पाली के सुशील मूंदड़ा, जोनल हैड ललित शर्मा, जोधपुर के विशेषज्ञ सुरेश अरोड़ा, चेतन लाखोटिया और सुशील मूंदड़ा ने उनके सवालों के जवाब दिए।

पैनल डिस्कशन में शहर के युवा, बुजुर्ग और महिलाओं ने निवेश से जुड़े सवाल पूछे।
म्यूचुअल फंड राजस्थान के रीजनल हैड मयंक कुमार सिंह ने बताया कि सेबी और इन्वेस्टर आईपी के माध्यम से निवेशकों को फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की जानकारी दी गई। वर्कशॉप की शुरुआत आईआईटी जोनल हैड ललित शर्मा ने प्रेजेंटेशन के जरिए आज के दौर में निवेश कर लक्ष्य हासिल करने की रणनीति समझाते हुए की।
उन्होंने म्यूचुअल फंड, बैंक डिपॉजिट, प्रॉपर्टी और इंश्योरेंस जैसे निवेश विकल्पों के बारे में जानकारी दी।
30 से 35 वर्ष की उम्र में निवेश के फायदे
उन्होंने बताया कि 30 से 35 वर्ष की उम्र में निवेश शुरू करने पर मासिक या साप्ताहिक निवेश के साथ लंबी अवधि के विकल्प बेहतर परिणाम दे सकते हैं। 18 वर्ष से अधिक आयु और केवाईसी पूर्ण करने वाले युवा नौकरी, विवाह, बच्चों की पढ़ाई जैसे लक्ष्यों के लिए निवेश की शुरुआत कर सकते हैं।
महिलाओं की पारंपरिक बचत से निवेश की सीख
विशेषज्ञों ने कहा कि जिस तरह कई घरों में महिलाएं अलग-अलग डिब्बों में पैसे रखकर बचत करती हैं, उसी तरह निवेश भी अलग-अलग विकल्पों में करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर यह राशि काम आती है। उन्होंने म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय फाइनेंशियल एडवाइजर की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई।
लक्ष्य के अनुसार निवेश जरूरी
विशेषज्ञों ने बताया कि निवेश हमेशा लक्ष्य के अनुसार करना चाहिए, जैसे बच्चों की शिक्षा, विवाह या भविष्य की जरूरतें आदि। निवेश में कोई गारंटी नहीं होती, इसलिए विशेषज्ञ सलाह जरूरी है। यदि किसी की 5-5 हजार रुपए की चार एसआईपी चल रही हैं तो उन्हें एक ही दिन के बजाय 20-25 दिन के अंतराल पर रखना बेहतर रहता है। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का लाभ मिल सकता है और रिटर्न बेहतर हो सकता है।
