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Hantavirus Outbreak on MV Hondius cruise ship: क्रूज शिप पर बढ़ती बीमारियां अब दुनिया के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं. हाल ही में MV होंडियस पर हंतावायरस और कैरिबियन प्रिंसेस पर नोरोवायरस के अटैक ने लग्जरी वेकेशन के पीछे के खतरे को उजागर किया है. बंद जगह और हजारों लोगों की भीड़ इन जहाजों को वायरस का घर बना देती है.
हंतावायरस, नोरोवायरस, कोविड-19… क्रूज शिप पर इतना ज्यादा क्यों होता है बीमारियों का खतरा? (Photo made with AI)
Hantavirus Outbreak: क्रूज वेकेशन को अक्सर समंदर के बीच एक आलीशान और सुरक्षित सफर के तौर पर दिखाया जाता है. शानदार खाना, मनोरंजन और अलग-अलग देशों की सैर का लालच किसी को भी अपनी ओर खींच लेता है. लेकिन पिछले कुछ समय में जहाजों पर फैली बीमारियों ने एक डरावनी हकीकत पेश की है. क्रूज शिप अब संक्रामक बीमारियों के लिए सबसे संवेदनशील जगह बन गए हैं. पिछले हफ्ते ही दो बड़े जहाजों पर वायरस का हमला हुआ है. इसमें एमवी होंडियस (MV Hondius) पर घातक हंतावायरस और कैरिबियन प्रिंसेस पर नोरोवायरस का प्रकोप शामिल है. कोरोना महामारी के बाद क्रूज टूरिज्म में काफी तेजी आई है. लोग अब अंटार्कटिक और दूरदराज के इलाकों की यात्रा करना पसंद कर रहे हैं. लेकिन यात्रियों की बढ़ती संख्या के साथ रिस्क भी बढ़ गया है. पिछले कुछ सालों में क्रूज पर नोरोवायरस, कोविड-19, लीजियोनेयर्स रोग और ई. कोलाई जैसे संक्रमण देखे गए हैं. अब हंतावायरस की एंट्री ने एक्सपर्ट्स की नींद उड़ा दी है. आखिर क्यों करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी यात्री इन बीमारियों का शिकार हो रहे हैं? यह सवाल अब ग्लोबल टूरिज्म इंडस्ट्री के सामने खड़ा है.
एमवी होंडियस पर हंतावायरस का कहर कैसे बरपा?
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली घटना डच ऑपरेशन वाले जहाज एमवी होंडियस पर हुई. यहां हंतावायरस के कारण कई यात्री गंभीर रूप से बीमार हो गए और कुछ की मौत भी हो गई. यह मामला इसलिए भी गंभीर था क्योंकि इसमें एंडीज वायरस स्ट्रेन (Andes virus strain) पाया गया.
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दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें
यह हंतावायरस का वह दुर्लभ रूप है जो इंसानों से इंसानों में फैल सकता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के मुताबिक इस क्लस्टर से जुड़े आठ लोग बीमार हुए. इनमें से तीन लोगों की जान जा चुकी है.
जब 2 मई को पहली बार इस आउटब्रेक की रिपोर्ट आई, तब जहाज पर 147 यात्री और क्रू मेंबर्स मौजूद थे. इसके अलावा 34 लोग पहले ही रास्ते में उतर चुके थे. डब्ल्यूएचओ ने बताया कि संक्रमित मरीजों का इलाज दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड और स्विट्जरलैंड में चल रहा है.
जांच में पता चला कि यह संक्रमण शायद जहाज पर चढ़ने से पहले ही शुरू हो गया था. पहला मरीज अर्जेंटीना या चिली में संक्रमित हुआ होगा. इन इलाकों में एंडीज वायरस का इतिहास रहा है. बाद में जहाज की बंद जगह में यह एक से दूसरे व्यक्ति में फैल गया.
अंटार्कटिक टूरिज्म में छिपा है कौन सा बड़ा खतरा?
अंटार्कटिका जैसे इलाकों में आसपास कोई बड़ा अस्पताल नहीं होता. ऐसे में जहाजों पर बीमारी की निगरानी और इलाज की तैयारी को लेकर हेल्थ एक्सपर्ट्स काफी चिंतित हैं. दूरदराज के इलाकों में टूरिज्म का बढ़ता शौक अब एक बड़ी चुनौती बन गया है.
सौ बात की एक बात
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— News18 India (@News18India) May 8, 2026

