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Health Tips: मई-जून की तेज गर्मी में सही आहार चुनना बेहद जरूरी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि सही भोजन आपको लू और कमजोरी से बचा सकता है. रोहू और कतला जैसी ताजी मछलियां इस मौसम में खास फायदेमंद हैं. ये सिर्फ शरीर को ठंडक नहीं देतीं, बल्कि इनमें मौजूद ओमेगा-3 थकान को भी जल्दी दूर करता है. जानिए क्यों इस गर्मी में मटन या चिकन के बजाय ताजी मछली चुनना बेहतर है और कौन-सी डाइट टिप्स डॉक्टर सलाह देते हैं. (रिपोर्ट: शिवांक द्विवेदी/सतना)

मई-जून की तपती गर्मी में जब पारा 45 डिग्री के पार जाने लगता है तब सबसे बड़ा सवाल हमारे खान-पान को लेकर होता है. क्या इस मौसम में नॉन-वेज खाना सही है? तो चलिए जानते है कौन सी मछली आपकी सेहत के लिए सुपर फूड साबित हो सकती है? ये मछलियां न केवल आपके स्वाद का ध्यान रखेंगी बल्कि इस भीषण गर्मी में आपके शरीर को ठंडक और ताकत भी देंगी.

भीषण गर्मी के मौसम में हमारा शरीर जल्दी थक जाता है और डिहाइड्रेशन की समस्या बनी रहती है. जिला पशु चिकित्सालय प्रभारी डॉ. बृहस्पति भारती ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि इस मौसम में रोहू और कतला जैसी मछलियां सेहत के लिए वरदान हैं.

रोहू को तो मछलियों का राजा माना जाता है. डॉक्टरों का मानना है कि रोहू और कतला में भरपूर मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है. यह न केवल आपके दिल का ख्याल रखता है बल्कि गर्मी के कारण होने वाली थकान और कमजोरी को दूर कर शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देता है.
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सबसे बड़ी बात यह है कि ये मछलियां लीन प्रोटीन का स्रोत हैं जो पेट को भारी नहीं करतीं. क्योंकि मछलियों में प्रोटीन की मात्रा चिकन और मटन से कही अधिक होती है साथ ही यह पचने में भी उनसे कहीं ज्यादा हल्की होती है. मई और जून का महीना मत्स्य पालकों के लिए भी उत्सव जैसा होता है.

इसी समय तालाबों में मछलियों के बीज डाले जाते हैं और टमस व सतना जैसी नदियों में ताजी मछलियां पकड़ी जाती हैं. डॉ. भारती बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में लोग आज भी नदी, नालों, तालाबों में मिलने वाली पारंपरिक मछलियों जैसे सिंघी, पॉम, पाहिन और कैटफिश को काफी पसंद करते हैं.

पुराने बुजुर्गों का मानना है कि प्राकृतिक बहते पानी की मछलियां ज्यादा पौष्टिक होती हैं. हालांकि, खाने वालों की अपनी पसंद होती है जहां रोहू अपने लाजवाब स्वाद के लिए जानी जाती है वहीं इसमें कांटों की संख्या थोड़ी ज्यादा होती है. जो लोग कांटों से बचना चाहते हैं उनके लिए सिंगल बोन वाली पाहिन और पॉम मछलियां बेहतरीन विकल्प साबित होती हैं.

गर्मी में मछली खाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. डॉक्टरों की सलाह है कि हमेशा ताजी मछली ही खरीदें. बासी या बर्फ में बहुत दिनों से रखी मछली पेट खराब कर सकती है. साथ ही गर्मी में मछली को बहुत ज्यादा तेल-मसाले में बनाने के बजाय हल्का ग्रिल करके या कम मसालों वाली करी बनाकर खाना ज्यादा फायदेमंद होता है.

वहीं बघेलखंड के खानपान की बात करें तो यहां रोहू और कतला का क्रेज सबसे ज्यादा है. यह न केवल किफायती हैं बल्कि स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध भी हैं. यह आपको गर्मी से लड़ने की शक्ति भी देगी और आपकी जीभ को वो खास जायका भी.