Kidney Transplant: आपकी किडनी रोजाना लगभग 200 लीटर खून को छानने का काम करती है. यानी हर मिनट लगभग आधा कप खून को फिल्टर कर देती है. शरीर में जितनी गंदगी, वेस्ट मैटेरियल या टॉक्सिन बनता है ये सब खून में आता है और किडनी इस सारे टॉक्सिन को पेशाब में फेंक देती है जो शरीर से बाहर निकल आता है. खून से गंदगी निकालने के अलावा किडनी शरीर में फ्लूड और इलेक्ट्रोलाइट्स को बैलेंस भी करती है. इसके साथ ही यह कुछ प्रकार के हार्मोन, प्रोटीन और ग्लूकोज भी बनाती है. इतने सारे काम करने वाली किडनी अगर खराब हो जाए तो क्या होगा. वास्तव में अगर किडनी में 10 प्रतिशत तक भी क्षमता है तो डायलिसिस के साथ व्यक्ति में किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत नहीं पड़ती. लेकिन अगर इससे कम क्षमता हो जाए तो किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है. लेकिन भारत में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए सालों का लंबा इंतजार करना पड़ता है. आखिर इसका क्या कारण है. आइए इसके बारे में किडनी स्पेशलिस्ट डॉ. सागर गुप्ता से जानते हैं.
किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत किसे
डॉ. सागर गुप्ता कहते हैं कि किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत लास्ट स्टेज में पड़ती है. यानी जब किडनी में काम करने की क्षमता सिर्फ 10 प्रतिशत तक बची है. इससे पहले हम डायलेसिस से काम चलाते हैं. किडनी ट्रांसप्लांट की नौबत क्यों आती है, इसके लिए हमें कुछ बातों को समझना होगा. किडनी ट्रांसप्लांट तक आने में सालों का समय लगता है. शरीर बहुत मौका देता है संभलने का. यदि इस अवधि के दौरान मरीज नहीं संभलता तो किडनी ट्रांसप्लांट कराना ही एकमात्र विकल्प बचता है. दरअसल, किडनी के खराब होने की सबसे बड़ी वजह डायबिटीज है. इसके बाद हाई ब्लड प्रेशर, किडनी में सूजन, घाव या फिल्डर की दिक्कत, लूपस नेफ्राइटिस, पोलीसिस्टिक किडनी डिजीज जैसी बीमारियां हैं. कुछ मामलों में जीन भी किडनी को खराब करती है. लेकिन इन सभी मामलों का अगर सही समय पर इलाज हो, डॉक्टरों के हिसाब से लाइफस्टाइल और खान-पान को सुधार लिया जाए तो रेयर ही किसी को किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है.
किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लंबा इंतजार क्यों
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल पौन 2 से 2 लाख लोगों में किडनी ट्रांसप्लांट की दरकार होती है. लेकिन 2024 में सिर्फ 13,476 लोगों में ही किडनी ट्रांसप्लांट हो सका. लिवर, हार्ट जैसे अंगों में तो और भी दयनीय स्थिति है. डॉ. सागर गुप्ता कहते हैं कि किडनी ट्रांसप्लांट में लंबा इंतजार के कई कारण हैं. दरअसल, किडनी ट्रांसप्लांट के दो तरीके हैं. पहला किसी जीवित व्यक्ति के शरीर से किडनी निकालकर मरीज में उसी किडनी को ट्रांसप्लांट किया जाए दूसरा ब्रेन डेड या दुर्घटना आदि में हुए मृत व्यक्ति से तत्काल किडनी को निकालकर अस्पताल पहुंचाया जाए. हालांकि इसके लिए भी जरूरी यह है कि दानकर्ता की किडनी का ब्लड ग्रुप मरीज के ब्लड ग्रुप से मैच करें. ऐसा परिवार के निकट संबंधियों के साथ ज्यादा होता है. यानी मरीज के माता-पिता, भाई-बहन की किडनी से मैच होने का चांस ज्यादा रहता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अन्य से मैच नहीं करेगा. लेकिन इसमें स्वीकार्यता नहीं है. हमारे समाज में यह गलत धारणा है कि अगर हम किडनी दान में दे देंगे तो हम कमजोर हो जाएंगे और हमारी एक किडनी उतना काम नहीं करेगी. यह गलत धारणा है. एक किडनी दान करने पर दूसरी किडनी उसी तरह काम करती है. दूसरी ओर हमारे देश में अंग दान करने की परंपरा भी बहुत कम है. दुर्घटना में हुई मौत के बाद भी मृत व्यक्ति का परिवार अंग दान नहीं करते. इन दो वजहों से देश में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए सालों का लंबा इंतजार करना पड़ता है.
किडनी ट्रांसप्लांट के लिए क्या प्रक्रिया
डॉ. सागर गुप्ता ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए सबसे पहले डोनर से कई तरह के टेस्ट लिए जाते हैं. उसके बाद अनुकूल समय में पहले डोनर का ऑपरेशन द्वारा किडनी निकाली जाती है. फिर इसी किडनी को इसी दिन मरीज के शरीर में लगाया जाता है. इसमें एक्सपर्ट मेडिकल एक्सपर्ट की एक पूरी टीम काम करती है. डोनर को अस्पताल में कम से कम चार से पांच दिन रहना पड़ता है वहीं मरीज को एक सप्ताह का समय अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में रहनी पड़ती है. इसके बाद मरीज को जिंदगी भर दवा खानी पड़ती है और उन्हें नियमित रूप से डॉक्टर के संपर्क में रहना पड़ता है.
किडनी ट्रांसप्लांट में कितना खर्च
किडनी ट्रांसप्लांट में सब मिलाकर करीब 5 से 6 लाख रुपये का खर्च आता है. सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में ही किडनी ट्रांसप्लांट होता है. इसके लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की एक पूरी टीम को लगना पड़ता है.
किडनी ट्रांसप्लांट की नौबत न आए, इसके लिए क्या करें
डॉ. सागर गुप्ता बताते हैं कि किडनी ट्रांसप्लांट की नौबत ही न आए इसके लिए तो सबसे बेहतर है कि हमेशा अपनी किडनी का ख्याल रखें. इसके लिए अपनी दिनचर्या सही करें. बाहर की गलत चीजें, पैकेटबंद चीजें, प्रोसेस्ड चीजें, शराब, सिगरेट, तंबाकू आदि का सेवन न करें. नियमित रूप से हरी सब्जियां, फल और सीड्स का सेवन करें. रोज एक्सरसाइज करें. इसके साथ ही 25 साल के बाद हर साल किडनी का चेकअप कराएं. अगर किडनी में कुछ दिक्कत होती है तो किडनी स्पेशलिस्ट डॉक्टर से सलाह लें और डॉक्टरों की सलाह पर अपनी दिनचर्या को फिक्स करें. जैसा वे कहें, उसी तरह काम करें.