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Is Period Pain Normal: पीरियड्स में दर्द कॉमन है, लेकिन इसे नॉर्मल मानना एक बड़ी भूल. यदि आपको हर महीने पीरियड पेन के लिए दवा लेने की जरूरत पड़ जाती है, तो आपको डॉक्टर से जांच करवाने की जरूरत है. गायनोलॉजिस्ट आस्था गुप्ता बताती हैं, कि ये किसी आंतरिक समस्या का संकेत हो सकता है.

How Much Pain is Normal For a Period: महिलाएं आज भी अपने हेल्थ को लेकर सीनियर नहीं है. जब तक प्रॉब्लम इतनी न हो जाए कि डॉक्टर के पास जाना पड़े तब तक वो दर्द को नजरअंदाज करती रहती हैं. पीरियड्स पेन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. हालांकि पीरिड्स में दर्द होना कॉमन है, लेकिन इसकी तीव्रता को ये कहकर टालना कि ऐसा तो सबके साथ होता है गलत है.
सालों से महिलाओं को बताया जाता रहा है कि पीरियड्स का दर्द औरत होने का एक नॉर्मल हिस्सा है,कई लड़कियों को यह यकीन दिलाया जाता है कि उन्हें पीरियड्स का दर्द सहना ही होगा, चाहे वह ऐंठन हो, पीठ दर्द हो, कमजोरी हो या जी मिचलाना हो, यह तो आम बात है. हालांकि, अगर दर्द इतना ज्यादा हो कि नॉर्मल जिंदगी की एक्टिविटीज करना मुश्किल हो जाए तो सावधान होने की जरूरत है.
हो सकता है वॉर्निंग साइन (How to tell if your period pain is normal?)
दिल्ली आईवीएफ में प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग की वरिष्ठ आईवीएफ सलाहकार और बांझपन विशेषज्ञ, डॉ. आस्था गुप्ता बताती हैं कि पीरियड्स में तेज दर्द वॉर्निंग साइन हो सकता है. हल्की-मॉडरेट ऐंठन आम है और इसे मेडिकली डिसमेनोरिया कहा जाता है. डिसमेनोरिया यूट्रस के सिकुड़ने की वजह से होता है, जिससे उसकी लाइनिंग निकलती है, जो प्रोस्टाग्लैंडीन नाम के हार्मोन जैसे सब्सटेंस से स्टिम्युलेट होती है. अगर किसी को पीरियड्स में इतनी तेज ऐंठन होती है कि उल्टी आ जाए या शरीर सीधा रखना मुश्किल हो, क्लास ऑफिस मिस करना पड़े या हर बार पीरियड्स में दवा लेने की जरूरत लगे, तो ये रेड फ्लैग है.
एंडोमेट्रियोसिस का लक्षण हो सकता है (symptom of endometriosis)
पीरियड्स में तेज दर्द एंडोमेट्रियोसिस का एक लक्षण है, जब महिला के यूट्रस का कुछ हिस्सा उसके शरीर के दूसरे हिस्सों में बढ़ने लगता है. इस टिशू से तेज दर्द, ज्यादा ब्लीडिंग हो सकती है और महिला बच्चे पैदा करने में भी असमर्थ हो सकती है. एडेनोमायसिस, इस बीमारी का एक और रूप है, जिसमें महिला के यूट्रस के अंदर का टिशू उसके यूट्रस की मांसपेशियों में बढ़ जाता है. इससे पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग और दर्द हो सकता है.
PCOS का भी खतरा
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) जैसी दूसरी बीमारियां अनियमित पीरियड्स का कारण बन सकती हैं और पीरियड्स के दौरान दर्द हो सकता है. ये सभी बीमारियां गंभीर हैं. इसका तुरंत उपचार जरूरी है,वरना महिला की फर्टिलिटी पर इसका नकारात्मक असर भी हो सकता है.
क्यों महिलाएं सहती हैं दर्द?
पीरियड्स के दर्द को समाज ने भी आम बात मान लिया है, जिससे इन महिलाओं को डायग्नोसिस मिलने में परेशानी होती है. जब छोटी लड़कियों को पीरियड्स में दर्द होता है, तो उन्हें अक्सर बताया जाता है कि हर कोई इससे गुजरता है, जिससे डायग्नोसिस मिलने में और देर हो जाती है. इसके अलावा, महिलाएं अक्सर ऐसे माहौल में काम करती हैं जहां पीरियड्स के दर्द पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता. इन मुद्दों पर चुप्पी इन महिलाओं की शारीरिक और मानसिक सेहत पर असर डालती है. इसमें एंग्जायटी, मूड में गड़बड़ी और निराशा की भावनाएं शामिल हो सकती हैं.
तकलीफ और डिसफंक्शन में अंतर समझें
डॉक्टर बताती हैं कि पीरियड्स में थोड़ी तकलीफ नॉर्मल है लेकिन अगर आप इसके कारण ठीक तरह से अपने रोजमर्रा के काम नहीं कर पाती हैं तो ध्यान देने की जरूरत है. अगर आपको पीरियड्स के दौरान रेगुलर दर्द होता है जो आपके रोजाना के रूटीन में रुकावट डालता है, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है जो कुछ दिनों से ज्यादा समय तक रहती है, या आपके पीरियड्स के दर्द के साथ दर्दनाक इंटरकोर्स या पॉटी मूवमेंट जैसे दूसरे लक्षण भी हैं, तो आपको अपने डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए.
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शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें
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