Swiggy Co-founder Resigns | Lakshmi Nandan Reddy Steps Down

Swiggy Co-founder Resigns | Lakshmi Nandan Reddy Steps Down


नई दिल्ली2 घंटे पहले

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फूड और ग्रोसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी के को-फाउंडर लक्ष्मी नंदन रेड्डी ओबुल ने कंपनी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है। स्विगी ने शुक्रवार को रेगुलेटरी फाइलिंग में इसकी जानकारी दी। ओबुल कंपनी में होल-टाइम डायरेक्टर और हेड ऑफ इनोवेशन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनका इस्तीफा आज (10 अप्रैल) से प्रभावी होगा।

कंपनी ने बताया कि ओबुल अब अपने दूसरे प्रोफेशनल हितों पर ध्यान देना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया है। ओबुल के जाने के साथ ही स्विगी के बोर्ड में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों और नियमों में बदलाव को भी मंजूरी दी गई है।

अल्वेस पिंटो को नॉमिनी डायरेक्टर नियुक्त किया

स्विगी के बोर्ड ने रेनन डी कास्त्रो अल्वेस पिंटो को नॉमिनी डायरेक्टर के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दी है। वे प्रोसस वेंचर्स को लीड करेंगे। वे रोजर राबलाइस की जगह लेंगे, जो प्रोसस वेंचर्स में अपनी भूमिका बदलने के कारण स्विगी बोर्ड से हट रहे हैं।

इसके अलावा स्विगी के को-फाउंडर और चीफ ग्रोथ ऑफिसर फणी किशन अडेपल्ली और ग्रुप CFO राहुल बोथरा को एडिशनल डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया है। इनकी नियुक्ति 1 जून 2026 से प्रभावी होगी।

लक्ष्मी नंदन रेड्डी ओबुल।

लक्ष्मी नंदन रेड्डी ओबुल।

CEO बोले- नंदन का विजन कंपनी के लिए अहम रहा

बोर्ड में हुए इन बदलावों पर स्विगी ग्रुप के CEO श्रीहर्ष मजेटी ने कहा, ‘नंदन स्विगी के सफर में एक विजनरी ताकत रहे हैं। बेंगलुरु के एक मोहल्ले से शुरू हुए स्विगी को देशव्यापी प्लेटफॉर्म बनाने में उनका योगदान अहम रहा है।’

फणी और राहुल की नियुक्ति पर मजेटी ने कहा, ‘ये दोनों स्विगी के शुरुआती दिनों से हमारे साथ हैं। कंपनी के सबसे कठिन और महत्वपूर्ण समय में इन्होंने बिजनेस को संभाला है। जैसे-जैसे हम ग्रोथ के अगले फेज में जा रहे हैं, उनकी समझ और अनुभव हमारे लॉन्ग-टर्म टारगेट को हासिल करने में मददगार साबित होंगे।’

आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में बदलाव, CEO को मिले नए अधिकार

स्विगी ने फाइलिंग में बताया कि बोर्ड ने आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) में बदलाव को मंजूरी दी है। इसके तहत एक्सेल और सॉफ्टबैंक के नॉमिनेशन राइट्स (निदेशक नामित करने के अधिकार) से संबंधित नियमों को हटा दिया गया है।

वहीं नियमों में एक बदलाव ऐसा भी किया गया है, जिससे CEO श्रीहर्ष मजेटी को खुद को और सीनियर मैनेजमेंट के किसी भी एक सदस्य को बोर्ड में नामित करने का अधिकार मिल गया है। हालांकि, यह अधिकार कुछ तय शर्तों के अधीन होगा।

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टाटा संस की लिस्टिंग के पक्ष में आए शापूरजी मिस्त्री: बोले- यह केवल रेगुलेटरी जरूरत नहीं, बल्कि ट्रांसपेरेंसी के लिए जरूरी कदम

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इससे न केवल ग्रुप में पारदर्शिता यानी ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी, बल्कि गवर्नेंस और जवाबदेही भी मजबूत होगी। बता दें कि टाटा संस में शापूरजी पलोनजी ग्रुप की करीब 18% हिस्सेदारी है। पूरी खबर पढ़ें…

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