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Symptoms of Cataracts: धुंधली नजर को अक्सर लोग हल्के में ले लेते हैं और इसे थकान, मोबाइल या कंप्यूटर पर ज्यादा समय बिताने की सामान्य परेशानी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन आंखों के विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार धुंधला दिखना या बार-बार नजर का धुंधला होना शरीर में किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है.

Symptoms of Cataracts: अगर आपको या आपके घर के बुजुर्ग को धुंधला दिखाई देने लगा है या बार-बार चश्मे का नंबर बदलना पड़ रहा है तो इसे नजरअंदाज करने की भूल ना करें. धुंधला-धुंधला दिखना यह मोतियाबिंद का शुरुआती संकेत हो सकता है. ऐसे में एक्सपर्ट बचाव का तरीका बताते हैं, जिसे फॉलो करने से राहत मिल सकती है. नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, मोतियाबिंद आजकल आम समस्या बन गई है, खासकर उम्र बढ़ने के साथ. समय पर इसका पता लगाकर इलाज करवाने से दृष्टि पूरी तरह बचाई जा सकती है.
मोतियाबिंद का ऑपरेशन बहुत सुरक्षित
मोतियाबिंद में आंख की लेंस धुंधली हो जाती है, जिससे साफ दिखना मुश्किल हो जाता है. यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है और अगर अनदेखी की गई तो दृष्टि और कमजोर हो सकती है. राहत भरी बात यह है कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन आजकल बहुत सुरक्षित, आसान और प्रभावी हो गया है. ज्यादातर मामलों में ऑपरेशन के बाद मरीज को अच्छी रोशनी और साफ नजर वापस मिल जाती है.
मोतियाबिंद के मुख्य लक्षण
मोतियाबिंद के मुख्य लक्षणों पर नजर डालें तो धुंधला या धुएं जैसा दिखना, रोशनी के चारों ओर अलग से चमक नजर आना, रात में ड्राइविंग या देखने में परेशानी, पढ़ने या छोटे अक्षर देखने में कठिनाई, रंग फीके या पीले पड़कर दिखना, और बार-बार चश्मे का नंबर बदलना पड़ना शामिल है. ये लक्षण खासकर 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में आम हैं, लेकिन कभी-कभी युवाओं में भी मोतियाबिंद हो सकता है. अगर बुजुर्गों की नजर धीरे-धीरे कमजोर हो रही है तो तुरंत आंखों के डॉक्टर से जांच करवाएं.
मोतियाबिंद का इलाज
डॉक्टर्स का कहना है कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन अब छोटी सी प्रक्रिया है. इसमें आंख की धुंधली लेंस निकालकर उसके जगह कृत्रिम लेंस लगाया जाता है. ऑपरेशन आमतौर पर 15-20 मिनट में पूरा हो जाता है और मरीज उसी दिन घर भी जा सकता है. इसमें दर्द बहुत कम होता है और रिकवरी भी तेज होती है. समय पर इलाज न करवाने से मोतियाबिंद बढ़ सकता है और आंख की रोशनी पूरी तरह जा सकती है, इसलिए धुंधली नजर को कभी भी हल्के में नहीं लेनी चाहिए.
50 वर्ष के बाद जरूर करवाएं चेकअप
एक्सपर्ट के अनुसार, नियमित आंखों की जांच करवाना सबसे अच्छा उपाय है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि 50 वर्ष की उम्र के बाद हर साल एक बार आंखों की जांच जरूर कराएं. स्वस्थ आहार, हरी सब्जियां, फल और धूप से बचाव भी मोतियाबिंद से बचाव में मदद कर सकता है.
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पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें