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Vishamushti Benefits: अक्सर हम अपने आसपास उगने वाले कई पौधों को खरपतवार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन आयुर्वेद की दुनिया में ये ‘अमृत’ के समान होते हैं. ऐसा ही एक पौधा है ‘विषामुष्टि’. सड़क किनारे, खाली मैदानों या झाड़ियों के बीच आसानी से दिखने वाला यह पौधा अपनी अद्भुत हीलिंग पावर के लिए जाना जाता है. सदियों से ग्रामीण इलाकों में इसे घरेलू उपचार का मुख्य हिस्सा माना गया है. विषामुष्टि की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका जड़ से लेकर पत्ती तक, हर हिस्सा औषधीय गुणों से भरपूर है. आइए, आयुष विशेषज्ञों से जानते हैं कि यह साधारण सा दिखने वाला पौधा गंभीर बीमारियों में कैसे सुरक्षा कवच का काम करता है.

विषामुष्टि (विषमुष्टि) एक ऐसा पौधा है, जिसे लोग आमतौर पर इसके नाम से नहीं जानते है. लेकिन ये पौधा आपको अक्सर सड़क किनारे, खाली मैदानों या झाड़ियों के बीच आसानी से देखने को मिल जाता है. यह कई तरह से काम का होता है गांवों में इसे पुराने समय से घरेलू इलाज में इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसकी खास बात यह है कि इसका हर हिस्सा काम आता है ये प्राकृतिक और सस्ते इलाज का अच्छा विकल्प बन रहे हैं.

आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल बताते है कि विषामुष्टि में ऐसे तत्व होते हैं जो शरीर की कोशिकाओं पर अच्छा असर डालते हैं यही वजह है कि इसे कैंसर जैसी बड़ी बीमारियों में भी सहायक माना जाता है हालांकि यह कोई सीधा इलाज नहीं है डॉक्टर की सलाह के बिना इसका इस्तेमाल करना नुकसान भी दे सकता है इसलिए सावधानी बहुत जरूरी है

अगर बार-बार सर्दी-जुकाम हो जाता है तो विषामुष्टि की पत्तियों का काढ़ा काफी राहत देता है गांवों में लोग इसे चाय की तरह पीते हैं इससे शरीर को फुर्ती मिलती है और गले की खराश भी कम होती है यह एक आसान घरेलू तरीका है जिसे सही तरीके से अपनाया जाए तो फायदा मिल सकता है
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आजकल गैस, कब्ज और पेट दर्द की समस्या आम हो गई है ऐसे में विषामुष्टि का इस्तेमाल राहत दे सकता है इसके सेवन से पाचन बेहतर होता है और पेट हल्का महसूस होता है कई लोग इसे घरेलू नुस्खे के तौर पर अपनाते हैं लेकिन मात्रा का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है वरना उल्टा असर भी हो सकता है इसलिए डॉक्टर की सलाह के बाद ही लें

अगर शरीर पर कोई पुराना घाव या फोड़ा-फुंसी हो जाए तो इसकी पत्तियों का लेप लगाया जाता है इससे घाव जल्दी भरने में मदद मिलती है आप इसे धोकर सीधे पीसकर लगा लेते हैं यह एक सस्ता और आसान तरीका है लेकिन साफ-सफाई का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी होता है ताकि संक्रमण न फैले

पुराने समय से मिर्गी के इलाज में भी विषामुष्टि का इस्तेमाल होता रहा है माना जाता है कि इसके पत्तों का रस नाक में डालने से दौरे को नियंत्रित करने में मदद मिलती है हालांकि यह तरीका हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं होता इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के इसे अपनाना सही नहीं है

विषामुष्टि की पत्तियों को मुहं की सफाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है इसके लिए पहले पत्तो को धो ले फिर उबालकर उसका पानी से कुल्ला करें इससे मुंह की बदबू, मसूड़ों की सूजन और दांत दर्द जैसी समस्याओं में राहत मिलती है कई लोग इसे प्राकृतिक माउथवॉश की तरह इस्तेमाल करते हैं यह आसान तरीका है

आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल बताते है विषामुष्टि जितना फायदेमंद है उतना ही गलत इस्तेमाल पर नुकसान भी दे सकता है इसकी सही मात्रा और सही तरीका जानना बहुत जरूरी है हर बीमारी में इसका उपयोग अलग-अलग तरीके से होता है इसलिए बेहतर यही है कि किसी आयुर्वेद डॉक्टर से सलाह लेकर ही इसका इस्तेमाल करें ताकि फायदे के बजाय कोई परेशानी न हो