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कुछ सपने अधूरे ही रह जाते हैं. वे इतिहास में ठहरे वो आंसू होते हैं, जिन्हें पोछा नहीं जा सकता. एक्टर जब बीमार मां के सिरहाने बैठकर उनके एक सपने को दम तोड़ता देख रहा था, तो उसका दिल भर आया था. मां के गुजरने के बाद वह अनाथ था. आखिरकार, साल 1992 में बॉलीवुड डेब्यू किया, तो मां की याद सबसे पहले आई. उन्हें आज पूरी दुनिया पहचानती है. बहुत ही दयालु एक्टर है. जिंदगी की तमाम मुश्किलों के बावजूद वे लोगों के साथ प्यार बांटते हैं, मगर आज भी मां का एक सपना पूरा न कर पाने की टीस दिल में लिए घूमते हैं.

नई दिल्ली: ‘कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता, कहीं जमीन कहीं आसमां नहीं मिलता’ निदा फाजली की गजल के इन दो मिसरों में जो फलसफा बयां हुआ है, वह इस दुनिया के हर इंसान का सच है. कोई कितना भी बड़ा हो जाए, कोई-न-कोई सपना अधूरा रह जाता है. कुछ-न-कुछ छूट जाता है. उस बॉलीवुड स्टार को ही लीजिए, जिसके पास अरबों की संपत्ति है, फिर भी जेहन में एक अधूरा सपना रात-बेरात दिल को सालता होगा. उस सपने ने उस दिन ही दम तोड़ दिया था, जिस दिन उसकी बीमार मां ने जिंदगी की आखिरी सांस ली थी. (फोटो साभार: AI से जेनरेटेड इमेज)

वो एक्टर अपने बॉलीवुड डेब्यू से पहले ही अनाथ हो गया. जब वह स्टार नहीं बना था, तब उसने एक इंटरव्यू में मां को खोने और उनके अधूरे सपने पर खुलकर बात की. एक्टर ने खुलासा किया कि उनकी मां हमेशा उन्हें बेहतर बनने के लिए प्रेरित करतीं, उन्हें खास महसूस करवाती थीं. मां ने उन्हें अपनी अहमियत का एहसास करवाया, मगर उनके गुजरने के बाद उन्हें लगा कि वह कुछ भी नहीं है. आज वह एक्टर बॉलीवुड का बेताज बादशाह शाहरुख खान हैं. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

शाहरुख खान ने बताया कि उनकी मां का सबसे बड़ा सपना उन्हें बड़े पर्दे पर देखना था, मगर वे बॉलीवुड डेब्यू से पहले ही अनाथ हो चुके थे. न मां पास थीं, न पिता. वे जब 14 साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया था.ईटाइम्स की रिपोर्ट के अनसुार, उन्हें पिता के निधन पर रोना नहीं आया, क्योंकि वे तब बहुत छोटे थे. जबकि, मां के निधन का उन पर गहरा असर पड़ा.
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शाहरुख खान उस वक्त गोवा में थे, तब उन्हें पता चला कि उनकी मां बीमार हैं. सुपरस्टार ने उस नाजुक पल को याद किया, जब वह सबके सामने रोने लगे थे. वे तीन दिन बाद दिल्ली लौट आए. काफी कोशिशों के बाद भी वह खुद को बेबस महसूस कर रहे थे.

शाहरुख खान ने उस पल को याद किया, जब अस्पताल से उनके पास कॉल आया था. वे मां की खराब सेहत के बारे में सुनकर दुखी हुए. वे एक जरूरी इंजेक्शन की तलाश में दिल्ली में एक जगह से दूसरी जगह भटकते रहे थे. (फोटो साभार: IMDb)

शाहरुख खान ने उस ‘हृदय-विदारक’ पल के बारे में भी बताया, जब उनकी मां अस्पताल में ट्यूब्स से घिरी हुई थीं. कुछ न कर पाने की बेबसी में उन्होंने अपनी मां से अपने दिल की बात कही. वे बातें आज उन्हें हल्की मालूम पड़ती हैं, मगर उस वक्त कहनी जरूरी लगी थीं. (फोटो साभार: IMDb)

दुखी शाहरुख खान ने अपनी बीमार मां के सिरहाने बैठकर उनका हाथ पकड़कर कहा था, ‘आप मर नहीं सकतीं, क्योंकि मैं बहुत दुखी हो जाऊंगा. आपने अभी तक मेरा नया शो नहीं देखा है. बहुत कुछ है, जो हमने साथ में नहीं किया है.’ वे इसे ड्रामेटिक सीन बताते हैं, मानो किसी फिल्म का सीन हो. (फोटो साभार: IMDb)

शाहरुख खान अपनी तमाम कोशिशों के बाद भी अपनी मां को नहीं बचा पाए. किंग खान ने एक बार बताया था कि वे मां के मरने पर नहीं रोए थे, लेकिन जब उन्हें दफनाया जा रहा था, तब उनके जज्बात उमड़ पड़े थे. उस पल उन्हें एहसास हुआ कि वे उतने महान नहीं हैं, जितना महान उन्हें उनकी मां बताती थीं. वे आज भी उनके बिना कम आत्मविश्वासी महसूस करते हैं. (फोटो साभार: IMDb)

शाहरुख खान ने आगे कहा था, ‘मां के मरने में कोई ड्रामा नहीं था. उनकी आंखें खुली हुई थीं. वे सिर्फ मुझे देख रही थीं और फिर अचानक आंखें बंद कीं और मर गईं. मैं रोया नहीं. रोना तब आया, जब मैं उन्हें दफना रहा था. कोई महान नहीं है. ऐसा कहना किसी को ठेस पहुंचाना नहीं है. मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि कुछ भी स्थायी नहीं है.’ किंग खान ने 1992 में ‘दीवाना’ से डेब्यू किया था, मगर उनकी सबसे अजीज मां उनके पास नहीं थीं. आज शाहरुख खान के पास हजारों करोड़ की संपत्ति है. उन्होंने अपने सब सपने पूरे किए, मगर मां का उन्हें स्क्रीन पर देखने का सपना कभी पूरा नहीं हुआ. (फोटो साभार: IMDb)