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Health Tips : गोरसपान उत्तराखंड के पहाड़ों में मिलने वाला औषधीय पौधा है, जिसे लोग दांत दर्द में राहत के लिए इस्तेमाल करते हैं. इसके पत्तों में एंटीसेप्टिक और दर्द कम करने वाले गुण होते हैं. लोकल 18 से औषधीय पौधों के जानकार पिथौरागढ़ के राम सिंह बताते हैं कि दर्द होने पर इसके पत्ते चबाने या रस लगाने से आराम मिलता है. यह सूजन और बैक्टीरिया को भी कम करता है. यह आमतौर पर घरों के आसपास, खेतों की मेड़ों या जंगल के किनारों पर उग जाता है. पहाड़ों में रहने वाले लोग इसे पहचानते भी हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत इसका इस्तेमाल भी कर लेते हैं.

राम सिंह बताते हैं कि गोरसपान एक प्राकृतिक और सुरक्षित उपाय है, फिर भी कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. हमेशा ताजे और साफ पत्तों का ही इस्तेमाल करें, अगर दर्द बहुत ज्यादा हो या कई दिनों तक बना रहे, तो डॉक्टर से जरूर दिखाएं. इसे सिर्फ प्राथमिक राहत के लिए इस्तेमाल करें, पूरी तरह इलाज के लिए नहीं.

राम सिंह बताते हैं कि कई बार दांत दर्द के साथ मसूड़ों में सूजन भी हो जाती है. गोरसपान इस स्थिति में भी काफी मददगार साबित होता है. इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन को कम करते हैं और मसूड़ों को आराम देते हैं. यह इंफेक्शन को फैलने से रोकता है, जिससे दर्द जल्दी कंट्रोल में आ जाता है.

गोरसपान पहाड़ी इलाकों में आसानी से मिलने वाला एक पारंपरिक औषधीय पौधा है. यह आमतौर पर घरों के आसपास, खेतों की मेड़ों या जंगल के किनारों पर उग जाता है. पहाड़ों में रहने वाले लोग इसे पहचानते भी हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत इसका इस्तेमाल भी कर लेते हैं. इसे उगाने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती, यह प्राकृतिक रूप से ही उग आता है. इसलिए इसे हर घर का “घरेलू डॉक्टर” भी कहा जाता है.
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पहाड़ों में पहले के समय में अस्पताल या दवाइयां आसानी से उपलब्ध नहीं होती थीं. ऐसे में लोग अपने आसपास मिलने वाले पौधों पर ही निर्भर रहते थे. गोरसपान भी उन्हीं में से एक है. दांत दर्द, मुंह की सूजन या हल्की चोट, इन सब में लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. यह पौधा सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि पहाड़ी संस्कृति और परंपरा का भी हिस्सा है.

गोरसपान का उपयोग कोई नया ट्रेंड नहीं है. यह सालों से पहाड़ी लोगों के जीवन का हिस्सा रहा है. दादी-नानी के समय से लोग इसे इस्तेमाल करते आए हैं और अपने अनुभव के आधार पर इसे अगली पीढ़ी को सिखाते रहे हैं. यह ज्ञान किताबों से नहीं, बल्कि अनुभव से आया है, इसलिए लोग इस पर भरोसा भी करते हैं.

दांत का दर्द अचानक शुरू हो जाता है और कई बार बहुत तेज होता है. ऐसे समय में गोरसपान के पत्ते तुरंत राहत देने में मदद करते हैं. इसके अंदर ऐसे प्राकृतिक गुण होते हैं जो दर्द को धीरे-धीरे कम करते हैं. जब इसे चबाया जाता है या इसका रस लगाया जाता है, तो यह दर्द वाली जगह पर असर करता है और नसों को थोड़ा शांत करता है.

गोरसपान के पत्तों में एंटीसेप्टिक, एंटी-बैक्टीरियल और दर्द निवारक गुण पाए जाते हैं. इसका मतलब यह है कि यह मुंह के अंदर मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करता है. यह सूजन को कम करता है और संक्रमण को बढ़ने से रोकता है. यही कारण है कि यह सिर्फ दर्द दबाने का काम नहीं करता, बल्कि उसकी जड़ पर भी असर डालता है.

गोरसपान का उपयोग करना बहुत आसान है. सबसे पहले इसके ताजे और साफ पत्ते तोड़ लें, उन्हें अच्छे से धो लें ताकि कोई गंदगी न रहे. अब इन पत्तों को हल्का-हल्का चबाएं और रस को दांत के दर्द वाली जगह पर रहने दें, अगर चबाना मुश्किल लगे, तो पत्तों को कूटकर उसका रस निकाल लें और सीधे दर्द वाली जगह पर लगा लें. कुछ ही समय में आपको राहत महसूस होने लगेगी.