IVF Cases in Jodhpur | What is IVF | जोधपुर में आईवीएफ केस बढ़े | Rising IVF Cases in Jodhpur News

IVF Cases in Jodhpur | What is IVF | जोधपुर में आईवीएफ केस बढ़े | Rising IVF Cases in Jodhpur News


जोधपुर. राजस्थान के जोधपुर शहर में आधुनिक जीवनशैली और करियर को प्राथमिकता देने के चलते विवाह की उम्र में 5 से 10 साल की देरी अब एक बड़ी सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या बनकर उभर रही है. इस बढ़ते ट्रेंड का सीधा असर दंपतियों की प्रजनन क्षमता पर पड़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप माता-पिता बनने के लिए ‘इन विट्रो फर्टिलाइजेशन’ (IVF) का सहारा लेने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है.

आंकड़ों के अनुसार, जोधपुर में हर साल करीब 1500 नए आईवीएफ मामले सामने आ रहे हैं. आर्थिक दृष्टि से देखें तो एक औसत आईवीएफ प्रक्रिया पर लगभग 2 लाख रुपये का खर्च आता है, जिससे शहर में इस तकनीक पर सालाना 25 से 30 करोड़ रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव, असंतुलित खानपान और बढ़ती उम्र के कारण प्राकृतिक रूप से संतान सुख पाने में चुनौतियां बढ़ गई हैं.

30 के बाद जैविक सीमाओं का बढ़ता प्रभाव

जोधपुर के विनायक हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कविता शर्मा के अनुसार, महिलाओं के शरीर में 20 से 30 वर्ष की आयु गर्भधारण के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. जैसे ही उम्र 30 के पार पहुँचती है, अंडाणुओं की संख्या और उनकी गुणवत्ता में गिरावट शुरू हो जाती है. 35 वर्ष की आयु के बाद यह गिरावट और भी तीव्र हो जाती है, जिससे प्राकृतिक गर्भधारण की संभावनाएं बेहद कम रह जाती हैं.

डॉक्टर बताती हैं कि देरी से शादी करने वाले जोड़ों को अक्सर इसी जैविक बाधा का सामना करना पड़ता है, जिसके बाद उनके पास मेडिकल सहायता लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता. हालांकि आईवीएफ की सफलता दर वर्तमान में 40 से 50 प्रतिशत के बीच है, लेकिन यह भी पूरी तरह से महिला की उम्र पर निर्भर करती है.

आधुनिक तकनीक और बदलता दृष्टिकोण
व्यस्त जीवनशैली के इस दौर में कामकाजी महिलाएं अब ‘एग फ्रीजिंग’ (अंडाणु संरक्षण) जैसी आधुनिक तकनीकों की ओर भी आकर्षित हो रही हैं, ताकि भविष्य में करियर स्थिर होने पर वे मातृत्व का आनंद ले सकें. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने सफलता दर में सुधार जरूर किया है, लेकिन डॉक्टर शर्मा का मानना है कि करियर और जैविक प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य है. कई बार महिलाएं जल्दी परिणाम की चाह में भी सीधे आईवीएफ प्रक्रिया को चुन लेती हैं. विशेषज्ञों की सलाह है कि अगर किसी कारणवश मातृत्व में देरी हो रही है, तो समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए. सही समय पर लिया गया चिकित्सकीय फैसला और संतुलित दिनचर्या कई शारीरिक और मानसिक परेशानियों को कम कर सकती है.

Q1. जोधपुर में IVF मामलों के बढ़ने की मुख्य वजह क्या है?
Ans. जोधपुर में IVF मामलों के बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह बदलती जीवनशैली और देर से शादी करने का ट्रेंड है. आज के समय में युवा पहले अपने करियर को स्थिर करना चाहते हैं, जिसके चलते शादी की उम्र 30 वर्ष या उससे अधिक हो रही है. इसके साथ ही तनाव, फास्ट फूड, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रही है. इन सभी कारणों के चलते प्राकृतिक रूप से गर्भधारण मुश्किल हो रहा है, जिससे दंपतियों को IVF जैसी मेडिकल तकनीकों का सहारा लेना पड़ रहा है.

Q2. जोधपुर में हर साल कितने दंपति IVF का सहारा ले रहे हैं और इसका क्या मतलब है?
Ans. जोधपुर में हर साल लगभग 1500 दंपति IVF तकनीक का सहारा ले रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि शहर में बांझपन या गर्भधारण में कठिनाई की समस्या तेजी से बढ़ रही है. यह आंकड़ा सिर्फ एक मेडिकल ट्रेंड नहीं बल्कि एक सामाजिक बदलाव की ओर भी इशारा करता है. पहले जहां लोग प्राकृतिक तरीके से माता-पिता बनते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग चिकित्सा सहायता ले रहे हैं. इससे यह भी साफ होता है कि आधुनिक जीवनशैली और बढ़ती उम्र का असर सीधे तौर पर परिवार नियोजन पर पड़ रहा है.

Q3. IVF प्रक्रिया पर होने वाला खर्च समाज पर क्या प्रभाव डाल रहा है?
Ans. IVF प्रक्रिया का खर्च आम लोगों के लिए काफी महंगा साबित हो रहा है, क्योंकि एक बार के इलाज में लगभग 2 लाख रुपये तक खर्च आता है. जोधपुर में इस पर सालाना 25 से 30 करोड़ रुपये तक खर्च हो रहे हैं, जो एक बड़ी आर्थिक गतिविधि बन चुकी है. इससे एक तरफ मेडिकल इंडस्ट्री को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है. कई दंपति अपने सपने को पूरा करने के लिए कर्ज तक लेने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे यह सिर्फ स्वास्थ्य नहीं बल्कि आर्थिक चुनौती भी बन गई है.

Q4. 30 साल के बाद महिलाओं की फर्टिलिटी में क्या बदलाव आते हैं और यह क्यों चिंता का विषय है?
Ans. 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में प्राकृतिक रूप से अंडाणुओं की संख्या और उनकी गुणवत्ता कम होने लगती है. 35 साल के बाद यह गिरावट और तेजी से होती है, जिससे गर्भधारण की संभावना काफी कम हो जाती है. यही कारण है कि डॉक्टर इस उम्र के बाद गर्भधारण को चुनौतीपूर्ण मानते हैं. यह स्थिति इसलिए चिंता का विषय है क्योंकि आज के समय में अधिकतर महिलाएं इसी उम्र के बाद मातृत्व की योजना बनाती हैं, जिससे उन्हें मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ती है और मानसिक तनाव भी बढ़ता है.

Q5. एग फ्रीजिंग जैसी तकनीक क्यों लोकप्रिय हो रही है और इसके क्या फायदे हैं?
Ans. एग फ्रीजिंग तकनीक आज की कामकाजी महिलाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है, क्योंकि यह उन्हें अपने करियर और मातृत्व के बीच संतुलन बनाने का विकल्प देती है. इस प्रक्रिया में महिलाएं कम उम्र में अपने अंडाणु सुरक्षित रख सकती हैं और भविष्य में जब वे तैयार हों, तब उनका उपयोग कर सकती हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि बढ़ती उम्र के बावजूद भी गर्भधारण की संभावना बनी रहती है. हालांकि यह तकनीक महंगी है, लेकिन यह उन महिलाओं के लिए एक सुरक्षित विकल्प बन रही है जो देर से शादी या मातृत्व की योजना बना रही हैं.



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