Pilot Association Demands DGCA Medical Report on Flight Duty Limits

Pilot Association Demands DGCA Medical Report on Flight Duty Limits


नई दिल्ली1 घंटे पहले

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एक हफ्ते में दो पायलटों की हार्ट अटैक से मौत के बाद ‘पायलट एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (ALPA) ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से एयरलाइंस पर सख्त रुख की मांग की है।

एसोसिएशन ने DGCA को पत्र लिखकर पायलटों की मेडिकल फिटनेस रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा, अपील की कि ड्यूटी के घंटों (FDTL) में ढील के किसी भी प्रस्ताव को तुरंत खारिज किया जाए। पायलटों ने कहा कि बढ़ते काम के बोझ और थकान से उनकी जान जोखिम में है।

हार्ट अटैक से दोनों पायलटों की मौत

हाल ही में एअर इंडिया के एक पायलट की बाली (इंडोनेशिया) में रेस्ट पीरियड के दौरान मौत हो गई। दो दिन बाद अकासा एयर के एक पायलट की ट्रेनिंग के दौरान मौत हो गई। दोनों मामलों में वजह हार्ट अटैक बताई गई।

हालांकि, दोनों पायलट घटना के वक्त ड्यूटी पर नहीं थे, लेकिन एसोसिएशन का तर्क है कि लगातार उड़ानों का दबाव और आराम की कमी पायलटों की सेहत पर भारी पड़ रही है।

DGCA को पत्र लिखकर नियम लागू करने में देरी पर उठाए सवाल

ALPA इंडिया ने DGCA प्रमुख वीर विक्रम यादव और नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा को पत्र लिखकर मांग की कि संशोधित ‘फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन्स’ (FDTL) नियमों को पूरी तरह लागू करने के लिए एक तय समय सीमा बनाई जाए।

एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि पायलटों की थकान की रिपोर्टिंग के लिए एक पारदर्शी सिस्टम होना चाहिए, जिसकी जानकारी हर 3 महीने में सार्वजनिक की जाए।

थकान की शिकायतों को नजरअंदाज कर रही हैं कंपनियां

एसोसिएशन ने RTI से मिली जानकारी का हवाला देते हुए बताया कि एयरलाइन ऑपरेटर्स द्वारा पायलटों की थकान से जुड़ी शिकायतों को स्वीकार करने की दर बहुत कम है।

पत्र में लिखा गया है कि यह ट्रेंड सुरक्षा संस्कृति के खिलाफ है और रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम को कमजोर करता है। पायलटों का कहना है कि सिर्फ कागजों पर रेगुलेटरी लिमिट का पालन करना काफी नहीं है, बल्कि पायलटों का असल में फिट और रिलैक्स्ड होना जरूरी है।

नए नियमों में क्या है खास और क्यों हो रही देरी?

सरकार ने पायलटों को अधिक आराम देने के लिए FDTL नियमों में बदलाव किया था, जिसमें साप्ताहिक आराम के घंटों को बढ़ाने और रात की उड़ानों की लिमिट तय करने की बात कही गई थी।

हालांकि, कई एयरलाइंस ने ऑपरेशनल दिक्कतों का हवाला देते हुए इन्हें लागू करने के लिए और वक्त मांगा है। ALPA का कहना है कि कमर्शियल फायदों के लिए सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं किया जा सकता।

नया टैलेंट होने का मतलब शोषण का लाइसेंस नहीं

पायलट एसोसिएशन ने कहा कि देश में नए और युवा पायलटों की बड़ी संख्या का मतलब यह नहीं कि एयरलाइंस इसका इस्तेमाल शोषण या सुरक्षा नियम हल्का करने के लिए करें।

एसोसिएशन ने मांग की कि पायलटों की मेडिकल फिटनेस का डेटा सार्वजनिक किया जाए ताकि जवाबदेही तय हो सके और भविष्य में ऐसी असामयिक मौतें रोकी जा सकें।

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